रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में ‘प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ आम नागरिकों के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी और क्रांतिकारी पहल साबित हो रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जिससे न केवल बिजली बिल का आर्थिक बोझ खत्म हो रहा है, बल्कि आम लोग ऊर्जा उत्पादन में पूरी तरह से आत्मनिर्भर भी बन रहे हैं। राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग के संयुक्त प्रयासों से इस योजना को तेजी से धरातल पर उतारा जा रहा है। अब तक प्रदेश के कई उपभोक्ता इस योजना से जुड़कर अपने घरों को सौर ऊर्जा से रोशन कर रहे हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के आवासीय परिवारों को अपनी बिजली स्वयं उत्पन्न करने के लिए प्रोत्साहित करना और कोयला आधारित पारंपरिक बिजली पर उनकी निर्भरता को कम करना है। बढ़ती महंगाई के इस दौर में मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए मासिक बिजली बिल बड़ी समस्या रहा है, लेकिन अब सोलर पैनल लगवाने के बाद उनका बिल लगभग 0 तक पहुंच गया है। सरकार की ओर से सोलर प्लांट लगाने के लिए भारी सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, जिसके कारण लोगों का रुझान इस ओर तेजी से बढ़ा है।
- योजना के तहत 1 से 3 किलोवाट क्षमता वाले सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाने पर उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का सीधा लाभ मिल रहा है।
- इस पर्यावरण हितैषी सिस्टम को स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 78000 रुपये और राज्य सरकार द्वारा 30000 रुपये तक की भारी सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
- घर की छतों पर उत्पन्न होने वाली अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर उपभोक्ता भविष्य के बिजली बिलों में भी क्रेडिट का अतिरिक्त लाभ उठा सकते हैं।
- योजना का लाभ लेने के लिए केवल भारत में निर्मित (DCR) सोलर पैनल और उपकरणों का उपयोग करना अनिवार्य किया गया है, जिससे स्वदेशी उद्योगों को भी भारी बढ़ावा मिल रहा है।
- रायपुर के साथ-साथ प्रदेश के अन्य जिलों में भी इस योजना के तहत भारी संख्या में आवेदन मिल रहे हैं और सरकार ने कई गांवों को ‘मॉडल सोलर विलेज’ के रूप में विकसित करने की दिशा में भी अहम कदम उठाए हैं।
इस योजना के सफल क्रियान्वयन से स्पष्ट होता है कि सौर ऊर्जा केवल विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले लाभार्थियों के अनुभव यह बताते हैं कि सोलर पैनल लगने के बाद उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है। जिन परिवारों का बिजली बिल पहले काफी अधिक आता था, आज वे इस चिंता से पूरी तरह मुक्त होकर अपने बच्चों की शिक्षा और अन्य जरूरी घरेलू जरूरतों पर वह पैसा खर्च कर पा रहे हैं। इसके साथ ही, व्यापक स्तर पर सौर ऊर्जा के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आ रही है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से ऐतिहासिक कदम है। प्रशासन की ओर से लोगों को जागरूक करने और योजना का लाभ आसानी से पहुंचाने के लिए डिजिटल पोर्टल और जनसहयोग केंद्रों के माध्यम से लगातार सहायता प्रदान की जा रही है। सब्सिडी की पूरी राशि भी सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी हुई है। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह सूर्यघर योजना मील का पत्थर साबित हो रही है, जिससे छत्तीसगढ़ अब हरित और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनकर उभर रहा है।
