छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों आम जनता को एक बड़ी और गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। शहर के कई प्रमुख इलाकों में ‘Raipur gas cylinder supply’ (रसोई गैस की आपूर्ति) बुरी तरह से चरमरा गई है। बुकिंग कराने के बावजूद हफ्तों तक सिलेंडर घर नहीं पहुंचने से लोगों के घरों का बजट और रसोई का कामकाज पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इस भारी लेटलतीफी ने उपभोक्ताओं में गैस एजेंसियों और प्रशासन के खिलाफ गहरी नाराजगी पैदा कर दी है।
Raipur gas cylinder supply: डिलीवरी में भारी देरी
राजधानी के विभिन्न हिस्सों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि गैस रिफिल बुक करने के बाद भी डिलीवरी (Delivery Delay) में 10 से 15 दिनों से अधिक का समय लग रहा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि जब वे गैस एजेंसियों (Gas Agencies) से संपर्क करते हैं, तो उन्हें ‘Raipur gas cylinder supply’ बाधित होने और पीछे से स्टॉक न आने का रटा-रटाया जवाब दे दिया जाता है। इस अव्यवस्था के कारण कई परिवारों को मजबूरन महंगे दामों पर बाहर से खाना मंगाना पड़ रहा है या फिर लकड़ी और स्टोव जैसे वैकल्पिक साधनों का उपयोग करना पड़ रहा है।
बैकलॉग (Backlog) और कर्मचारियों की कमी बनी वजह
गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार, इस संकट के पीछे मुख्य कारण गैस बॉटलिंग प्लांट (Bottling Plant) से होने वाली सप्लाई में अचानक आई कमी है। इसके अलावा, डिलीवरी कर्मचारियों (Delivery Boys) की कमी और पिछले कुछ हफ्तों का जमा हुआ बैकलॉग (Backlog) भी इस देरी को और बढ़ा रहा है।
ब्लैक मार्केटिंग (Black Marketing) की आशंका और प्रशासन की चुप्पी
डिलीवरी में इतनी लंबी देरी होने के कारण शहर में रसोई गैस की ब्लैक मार्केटिंग (कालाबाजारी) की आशंका भी बढ़ गई है। कुछ उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि अतिरिक्त पैसे देने पर सिलेंडर तुरंत मिल जाता है। इस पूरे मामले पर खाद्य विभाग (Food Department) और जिला प्रशासन की खामोशी से जनता का गुस्सा और भड़क रहा है। लोगों ने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप कर आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाने की सख्त मांग की है।
