रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 1 बार फिर धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर भारी बवाल और तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। रविवार को शहर के 1 किराए के मकान में आयोजित की जा रही 1 प्रार्थना सभा में अचानक उस वक्त हंगामा मच गया, जब वहां बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर धर्मांतरण का गंभीर आरोप लगाया। मिली जानकारी के मुताबिक, इस मकान में कथित रूप से ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था, जिसका हिंदूवादी संगठनों ने कड़ा विरोध किया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और ईसाई धर्म से जुड़े कुछ लोगों को थाने ले आई। लेकिन इस मामले ने तब 1 नया और अधिक गंभीर मोड़ ले लिया जब पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए। देखते ही देखते बजरंग दल और भीम आर्मी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और दोनों ही पक्षों की भारी भीड़ सिविल लाइन थाने के बाहर जमा हो गई, जिससे इलाके में 1 बेहद तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस पूरे मामले को शांत कराने का प्रयास किया और मुख्य आरोपी सहित कुल 4 लोगों को तत्काल हिरासत में ले लिया है। इस पूरी घटना ने प्रदेश में धर्मांतरण के संवेदनशील मुद्दे को 1 बार फिर से पूरी तरह गरमा दिया है।
- रायपुर के 1 किराए के मकान में रविवार को प्रार्थना सभा का आयोजन किया जा रहा था, जहां कथित तौर पर ईसाई धर्म का प्रचार किया जा रहा था।
- बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए इस सभा का पुरजोर विरोध किया, जिसके बाद पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप किया।
- पुलिस द्वारा कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी सिविल लाइन थाने पहुंच गए और दोनों संगठनों के बीच सीधे टकराव की स्थिति बन गई।
- प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लेते हुए इस मामले में 4 लोगों को हिरासत में लिया है और मुख्य आरोपी के खिलाफ विधिवत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।
- यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार आगामी विधानसभा के बजट सत्र में धर्मांतरण रोकने के लिए ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ लाने की पूरी तैयारी कर चुकी है।
इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में भी सरगर्मी काफी तेज हो गई है। राज्य सरकार पहले से ही धर्मांतरण के मुद्दे पर अपना सख्त रुख अपनाए हुए है। सूत्रों की मानें तो छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार इस पूरे मामले को लेकर 1 बेहद सख्त कानून बनाने जा रही है, जिसका पूरा मसौदा राज्य के गृह विभाग ने गंभीरता से तैयार कर लिया है। सरकार आगामी विधानसभा के बजट सत्र में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ पेश करने वाली है, जो राज्य में लागू पुराने 1968 के अधिनियम की जगह लेगा। इस नए और सख्त कानून को तैयार करने के लिए ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित देश के कुल 9 राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। इस प्रस्तावित विधेयक का मुख्य उद्देश्य किसी भी व्यक्ति को लालच, धोखाधड़ी, प्रलोभन या किसी भी प्रकार के भारी दबाव में डालकर किए जाने वाले अवैध धर्मांतरण पर पूरी तरह से रोक लगाना है। नए कानून के तहत यदि कोई भी व्यक्ति बिना प्रशासन को पूर्व सूचना दिए जबरन धर्म परिवर्तन करवाता है, तो उसे 10 वर्ष तक की कठोर सजा का स्पष्ट प्रावधान किया जा सकता है। इसके साथ ही, इस कानून में जबरन धर्मांतरण की स्पष्ट और विस्तृत व्याख्या भी की जाएगी ताकि इसका भविष्य में कोई दुरुपयोग न हो सके। यह विधेयक विधानसभा से सफलतापूर्वक पारित होने के बाद राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह 1 पूर्ण और प्रभावी कानून का रूप ले लेगा। रायपुर की यह ताजा घटना इस बात का बिल्कुल स्पष्ट संकेत है कि प्रदेश में धर्मांतरण का यह मुद्दा कितना संवेदनशील है और पुलिस-प्रशासन को इसे रोकने के लिए जमीनी स्तर पर कितनी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस फिलहाल मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और इलाके में कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी मुस्तैदी बरत रही है।
