नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव और संभावित सैन्य टकराव की आहट के बीच एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया गया है। अमेरिकी वायुसेना ने 24 और 25 फरवरी 2026 को इजरायल के एक दक्षिणी एयरबेस पर अपने सबसे उन्नत और घातक माने जाने वाले लगभग 12 ‘एफ-22 रैप्टर’ (F-22 Raptor) स्टील्थ फाइटर जेट्स तैनात कर दिए हैं। मध्य पूर्व में यह तैनाती स्पष्ट रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर संभावित अमेरिकी हमले की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ब्रिटेन के लैकेनहिथ एयरबेस से लंबी उड़ान भरकर ये अत्याधुनिक लड़ाकू विमान इजरायल की धरती पर पहुंचे हैं, जिससे पूरे अरब क्षेत्र में सैन्य हलचल तेज हो गई है।
पांचवीं पीढ़ी के इन लड़ाकू विमानों का निर्माण दिग्गज रक्षा कंपनियों लॉकहीड मार्टिन और बोइंग ने विशेष रूप से अमेरिकी वायुसेना के लिए किया है। इनकी सबसे बड़ी खासियत इनकी ‘स्टील्थ’ तकनीक है, जिसकी मदद से ये दुश्मन के रडार की पकड़ में आए बिना ही उनके हवाई क्षेत्र में गहराई तक घुसकर सटीक और विनाशकारी हमला करने में पूरी तरह सक्षम हैं। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इजरायल के दक्षिणी एयरबेस पर इनकी मौजूदगी का रणनीतिक अर्थ यह है कि यहां से ये जेट ईरान के उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम को भी आसानी से भेद सकते हैं। सबसे अहम बात यह है कि ये विमान जवाबी ईरानी मिसाइलों की जद से बाहर रहते हुए अपने निर्धारित लक्ष्यों को नेस्तनाबूद कर सकते हैं।
इस फाइटर जेट की मारक क्षमता और खूबियों से जुड़े कुछ अहम तथ्य इस प्रकार हैं:
- एफ-22 रैप्टर की अधिकतम गति लगभग 2,414 किलोमीटर प्रति घंटा है और यह दुश्मन की नजरों से बचकर 50,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है।
- इसमें दो प्रैट एंड व्हिटनी (Pratt & Whitney F119-PW-100) टर्बोफैन इंजन लगे हैं और बिना रुके इसकी मारक क्षमता (रेंज) 3,000 किलोमीटर से भी ज्यादा आंकी गई है।
- यह लड़ाकू विमान हवा से हवा में मार करने वाली अत्याधुनिक मिसाइलों (AIM-120 और AIM-9) के साथ-साथ जमीन पर तबाही मचाने वाले 1,000 पाउंड के बम ले जाने में सक्षम है।
- अपनी ‘स्टील्थ’ खूबी को हर हाल में बनाए रखने के लिए यह जेट अपने सभी हथियारों को विमान के आंतरिक हिस्से (इंटरनल वेपन बे) में छिपाकर उड़ान भरता है।
- इस जेट का पहली बार युद्धक इस्तेमाल सितंबर 2014 में सीरिया और इराक में आईएसआईएस के खिलाफ हुआ था, जबकि जून 2025 में ईरान के ठिकानों पर हुए हमले में भी यह शामिल रहा है।
मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में अमेरिकी नेतृत्व की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि यदि ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम पर कूटनीतिक बातचीत विफल होती है, तो उसके खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। एफ-22 रैप्टर जैसे अजेय लड़ाकू विमानों की यह भारी तैनाती उसी आक्रामक सैन्य रणनीति को जमीन पर उतारने का प्रारंभिक चरण माना जा रहा है। इन विमानों में थ्रस्ट वेक्टरिंग और उन्नत रडार सिस्टम मौजूद है, जो इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के माहौल में इन्हें अद्वितीय बनाता है।
वर्तमान समय में दुनिया का कोई भी अन्य लड़ाकू विमान इसके ‘पहले देखो, पहले मारो, पहले जीतो’ वाले आक्रामक सिद्धांत का मुकाबला नहीं कर सकता है। ऐसे में इजरायल की सरजमीं पर इन अमेरिकी फाइटर जेट्स के भारी तादाद में उतरने से मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक तापमान अपने चरम पर पहुंच गया है। पूरी दुनिया की निगाहें अब ईरान की प्रतिक्रिया और अमेरिका की अगली रणनीतिक तैयारियों पर टिक गई हैं। यह सैन्य जमावड़ा इस बात का पुख्ता इशारा है कि अमेरिका किसी भी बड़े युद्ध के लिए खुद को पूरी तरह मुस्तैद कर चुका है।
