मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे भीषण युद्ध के बीच एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली कूटनीतिक ख़बर सामने आई है। ताज़ा Sri Lanka US Jets (श्रीलंका यूएस जेट्स) अपडेट के अनुसार, श्रीलंका सरकार ने अमेरिका के लड़ाकू विमानों को अपने देश में लैंडिंग और ईंधन भरने की अनुमति देने से साफ़ इनकार कर दिया है। यह अहम् फ़ैसला ऐसे वक़्त में आया है जब वैश्विक स्तर पर तनाव चरम पर है और प्रमुख महाशक्तियां अपनी सैन्य उपस्थिति मज़बूत करने में जुटी हैं।
Sri Lanka US Jets: कूटनीतिक (Diplomatic) दबाव और तटस्थता
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, अमेरिकी प्रशासन ने श्रीलंका से अपने लड़ाकू विमानों के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट और लैंडिंग की मांग की थी। लेकिन Sri Lanka US Jets विवाद में श्रीलंका ने अपनी पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति और तटस्थता (Neutrality) का हवाला देते हुए इस बड़े सैन्य अनुरोध को ठुकरा दिया है। श्रीलंका का यह सख़्त क़दम साफ़ दर्शाता है कि वह मध्य पूर्व के इस ख़तरनाक संघर्ष में किसी भी गुट का सीधे तौर पर हिस्सा नहीं बनना चाहता।
क्षेत्रीय सुरक्षा (Regional Security) पर सीधा असर
हिंद महासागर (Indian Ocean) में श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति बेहद अहम है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को मिली इस नाकामी से उसकी सैन्य रणनीतियों पर असर पड़ सकता है। वहीं, श्रीलंका के इस ताज़ा और बड़े फ़ैसले को लेकर दक्षिण एशिया (South Asia) की राजनीति में भी भारी हलचल मच गई है, क्योंकि यह सीधे तौर पर क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा और संवेदनशील मामला है।
वैश्विक राजनीति (Global Politics) में नए समीकरण
श्रीलंका का यह साहसिक क़दम अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बड़ा संदेश है। यह स्पष्ट करता है कि छोटे देश भी अब बड़ी ताक़तों के दबाव में आने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों (National Interests) को सर्वोपरि रख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस कूटनीतिक फ़ैसले के गहरे परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
