Strait of Hormuz Crisis: 100 डॉलर के पार होगा कच्चा तेल?

Strait of Hormuz Crisis

होरमुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाज़ार में भारी हलचल मचा दी है। ईरान हमलों के बाद क्रूड ऑयल में 13 फ़ीसदी का बड़ा उछाल देखा गया है।

इस संकट के कारण कच्चे तेल की क़ीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का ख़तरा पैदा हो गया है। भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरत का लगभग 84 से 90 फ़ीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है।

इसलिए भारत सरकार इस स्थिति पर कड़ी नज़र रखे हुए है और कैबिनेट की सुरक्षा समिति की बैठकें भी जारी हैं।

भारत के पास क्रूड ऑयल के क्या नए विकल्प हैं?

अगर इराक, सऊदी अरब और UAE से आने वाले तेल की आपूर्ति बाधित होती है, तो भारत अपनी विविधीकरण रणनीति को तेज़ करेगा।

  1. भारत उन देशों से आयात बढ़ाएगा जिनका रास्ता इस जलडमरूमध्य से होकर नहीं गुज़रता। इनमें अमेरिका, नाइजीरिया, अंगोला, ब्राज़ील और गुयाना शामिल हैं।
  2. विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में मौजूद भूमिगत गुफ़ाओं में सुरक्षित भंडार आपातकाल में लगभग 9.5 दिनों की ज़रूरत पूरी कर सकते हैं।
  3. भारतीय रिफ़ाइनरियों के पास 10 से 15 दिनों का अतिरिक्त स्टॉक हमेशा रिज़र्व रहता है।

क्या भारत फिर से रूस से तेल ख़रीदेगा?

हाल ही में जनवरी और फ़रवरी 2026 के दौरान अमेरिकी दबाव में भारत ने रूसी तेल आयात घटाया था। लेकिन होरमुज़ संकट के बाद रूस फिर से मददगार साबित हो सकता है।

अरब सागर में रूस के कई तेल टैंकर मौजूद हैं। भारत इन जहाज़ों को तुरंत अपनी रिफ़ाइनरियों की ओर मोड़ सकता है।

तेल आयात महंगा होने से मालभाड़ा और जहाज़ों का बीमा प्रीमियम भी 50 फ़ीसदी तक बढ़ गया है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव पड़ सकता है।

रसोई गैस को लेकर क्या चिंताएँ हैं?

कच्चे तेल के तो विकल्प मौजूद हैं, लेकिन रसोई गैस और प्राकृतिक गैस के लिए भारत मुख्य रूप से कतर और UAE पर निर्भर है।

इनका कोई बड़ा रिज़र्व भारत के पास नहीं होने के कारण, आने वाले दिनों में रसोई गैस की क़ीमतों पर सीधा असर देखने को मिल सकता है।