पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भयंकर युद्ध (US-Iran War) और भारी तनाव के कारण बंद पड़े होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की क़वायद तेज़ हो गई है। ताज़ा Strait of Hormuz Meeting (स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ मीटिंग) अपडेट के अनुसार, गुरुवार को ब्रिटेन की अगुवाई में इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित करने के लिए दुनिया भर के देशों की एक अहम् बैठक हुई। आधिकारिक न्यूज़ जानकारी के मुताबिक़, इस वर्चुअल मीटिंग में भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी शामिल हुए और उन्होंने भारत का बेहद सख़्त और स्पष्ट रुख़ दुनिया के सामने रखा।
Strait of Hormuz Meeting: ‘हम इकलौते देश जिसने नाविक खोए’
ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारत ने बिल्कुल साफ़ शब्दों में कहा कि हम इकलौते ऐसे देश हैं, जिसने इस पूरे वैश्विक विवाद में अपने निर्दोष नाविकों को खोया है। विदेश सचिव ने होर्मुज़ स्ट्रेट को जल्द से जल्द खोलने और सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने की ज़ोरदार वकालत की। इस बैठक में फ़्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। हालांकि, इस मीटिंग में अमेरिका को आमंत्रित नहीं किया गया था।
डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के बयान के बाद हुई अहम् बैठक
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ़ किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप सुरक्षित समुद्री यातायात का हमेशा समर्थन करता है। ग़ौरतलब है कि यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस टेलीविज़न संबोधन के महज़ कुछ घंटों बाद हुई, जिसमें उन्होंने साफ़ कहा था कि इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा करना दुनिया के अन्य देशों की ज़िम्मेदारी है।
समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) बनी बड़ी चुनौती
ज़मीनी सूत्रों का कहना है कि बारूदी सुरंगों वाले इस ख़तरनाक जलमार्ग से व्यापारिक जहाज़ों के लिए सुरक्षित रास्ता पक्का करना अभी भी एक बेहद पेचीदा मामला बना हुआ है। इसे सुरक्षित बनाने के लिए ईरान की तरफ़ से क़रीबी तालमेल की सख़्त ज़रूरत है, ताकि भविष्य में कोई नुक़सान न हो।
