ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच पिछले 6 दिनों से जारी खूनी संघर्ष ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। इस महायुद्ध के बीच एक पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने ऐसा चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है। उनका कहना है कि मध्य पूर्व में ‘US bases destroyed’ (अमेरिकी बेस तबाह) हो चुके हैं और अब अमेरिका को सैन्य रसद के लिए भारत पर निर्भर होना पड़ रहा है।
US bases destroyed: पूर्व अमेरिकी कर्नल का बड़ा दावा
पूर्व अमेरिकी कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने इस युद्ध को लेकर यह सनसनीखेज बयान दिया है। उनके अनुसार, इस संघर्ष में ईरान बेहद मजबूती से लड़ रहा है और उसने मध्य पूर्व में स्थित अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और बंदरगाहों को भारी नुकसान पहुंचाया है। मैकग्रेगर ने स्पष्ट कहा, “असल में हमारे बेस तबाह हो चुके हैं और अब हमें युद्ध के लिए भारत और भारतीय बंदरगाहों पर निर्भर रहना होगा।” यह दावा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि हाल ही में कुवैत में एक ईरानी ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है।
शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने मानी खतरे की बात
पूर्व कर्नल के इस दावे की गंभीरता अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के बयानों में भी झलकती है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बुधवार को स्वीकार किया कि ईरान के कुछ हवाई हमले अभी भी उनके वायु रक्षा प्रणाली को भेदकर लक्ष्यों तक पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि युद्धग्रस्त इलाके में अमेरिकी सैनिकों पर अभी भी बहुत ज्यादा जोखिम मंडरा रहा है।
क्या भारत बनेगा इस युद्ध का हिस्सा?
हालाँकि पूर्व कर्नल ने यह दावा किया है कि सैन्य रसद के लिए अमेरिका भारत की तरफ रुख कर रहा है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन या भारत सरकार की ओर से सैन्य बेस के इस्तेमाल को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि युद्ध के मोर्चे पर उनकी स्थिति बहुत मजबूत है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत इस तनावपूर्ण माहौल में अपनी तटस्थता बरकरार रख पाएगा।
