मध्य पूर्व में जारी भयंकर युद्ध और लाल सागर में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत सामने आई है। वैश्विक ऊर्जा संकट को टालने के उद्देश्य से, अमेरिका ने भारत को एक बड़ी राहत देते हुए रूस से कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट प्रदान की है। यह अहम फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक तेल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।
ईरान युद्ध के बीच मिला Russian oil exemption
मौजूदा समय में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध ने खाड़ी देशों से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति को लगभग रोक दिया है। इसी संकट को देखते हुए वाशिंगटन ने भारत को यह 30 दिनों का ‘Russian oil exemption’ (विशेष छूट) दिया है। इस रियायत के तहत भारतीय रिफाइनरियां बिना किसी अमेरिकी प्रतिबंध (Sanctions) या प्राइस कैप के डर के रूस से कच्चा तेल आयात कर सकेंगी। अमेरिका का यह कदम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वह इस युद्धकाल में भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक बाजार की निर्भरता को समझ रहा है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए निर्णायक कदम
भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। मध्य पूर्व के अस्थिर हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ठप होने के बाद भारतीय बाजार पर भारी दबाव था। इस ‘Russian oil exemption’ के जरिए नई दिल्ली अपनी घरेलू मांग को सुचारू रूप से पूरा करने के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाले संभावित भारी उछाल को भी रोक सकेगी।
कूटनीतिक जीत और अर्थव्यवस्था पर असर
यह 30 दिन की मोहलत भारतीय विदेश नीति की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि अमेरिका के इस फैसले से न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को महंगाई से राहत मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार (Global Oil Market) में भी स्थिरता आएगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस एक महीने की छूट को स्थिति सामान्य होने तक आगे बढ़ाया जाएगा।
