मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण तनाव के बीच एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। हाल ही में ईरान के एक गर्ल्स स्कूल पर हुए जानलेवा हवाई हमले को लेकर एक आधिकारिक अमेरिकी जांच (US Probe) में बड़ा और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस आंतरिक जांच रिपोर्ट में वाशिंगटन ने स्वीकार किया है कि ‘US strike on Iran school’ (ईरान के स्कूल पर अमेरिकी हमला) कोई पूर्व-नियोजित सैन्य अभियान नहीं, बल्कि एक बेहद गंभीर ‘टारगेटिंग की गलती’ (Targeting Mistake) का भयानक परिणाम था। इस ऐतिहासिक सैन्य चूक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी कूटनीतिक भूचाल ला दिया है।
US strike on Iran school: ‘टारगेटिंग एरर’ से गई मासूमों की जान
अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के सूत्रों द्वारा जारी की गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य खुफिया तंत्र (Military Intelligence) और ड्रोन ऑपरेटर्स के बीच समन्वय की भारी कमी पाई गई। ‘US strike on Iran school’ की इस हृदयविदारक घटना में, संदिग्ध सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के बजाय, गलत निर्देशांक (Wrong Coordinates) फीड होने के कारण मिसाइल सीधे एक गर्ल्स स्कूल पर जा गिरी। इस भयावह हमले में कई मासूम छात्राओं को अपनी जान गंवानी पड़ी, जिसने मानवाधिकारों की रक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरान में भारी आक्रोश और अंतरराष्ट्रीय निंदा
इस अमेरिकी खुलासे के बाद ईरान (Iran) में भारी जन-आक्रोश भड़क उठा है। ईरानी नेतृत्व ने इस हमले को सीधे तौर पर ‘युद्ध अपराध’ (War Crime) करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) से निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही, कई वैश्विक मानवाधिकार संस्थाओं (Human Rights Organizations) ने इस घातक सैन्य लापरवाही की कड़े शब्दों में निंदा की है। उनका स्पष्ट कहना है कि केवल ‘गलती’ मान लेने से इस अपूरणीय क्षति की भरपाई नहीं हो सकती।
जिम्मेदारी और जवाबदेही (Accountability) की मांग
इस भीषण त्रासदी के बाद, अमेरिकी प्रशासन पर अब जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) करने का भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव है। यह देखना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और जवाबदेही तय करने के लिए अपने सैन्य प्रोटोकॉल में क्या बदलाव करता है।
