केंद्र सरकार (Central Government) देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। ताज़ा राजनीतिक हलचलों और सूत्रों के अनुसार, मोदी सरकार ‘Women’s reservation implementation’ (महिला आरक्षण लागू करने) की दिशा में अब तेजी से आगे बढ़ रही है। माना जा रहा है कि सरकार इसी मौजूदा संसदीय सत्र (Parliament Session) में इसे जल्द से जल्द लागू करने के लिए एक नया बिल या आवश्यक संशोधन ला सकती है।
Women’s reservation implementation: इसी सत्र में आ सकता है बिल
संसद के दोनों सदनों से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) पहले ही पारित हो चुका है, लेकिन इसके लागू होने की समयसीमा को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा था। अब सरकार ‘Women’s reservation implementation’ को लेकर पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार इसी सत्र में कुछ अहम कानूनी संशोधन पेश कर सकती है, ताकि इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले या आगामी बड़े विधानसभा चुनावों में ही धरातल पर उतारा जा सके।
परिसीमन और जनगणना की कानूनी बाधाएं
मूल कानून के प्रावधानों के अनुसार, महिला आरक्षण को नई जनगणना (Census) और परिसीमन (Delimitation) की लंबी प्रक्रिया के बाद ही लागू किया जाना था। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि सरकार कानूनी विशेषज्ञों के साथ मिलकर इन तकनीकी बाधाओं को पार करने या प्रक्रिया को तेज (Fast-track) करने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार का मुख्य लक्ष्य बिना किसी देरी के आधी आबादी को उनका राजनीतिक अधिकार सौंपना है।
लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण
इस ऐतिहासिक कानून के पूरी तरह से लागू होने के बाद लोकसभा (Lok Sabha) और देश की सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत (33%) सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यदि केंद्र सरकार इसे समय से पहले लागू करने में सफल होती है, तो यह भारतीय राजनीति की दशा और दिशा दोनों बदल देगा, और आगामी चुनावों में महिला मतदाताओं (Women Voters) का प्रभाव निर्णायक रूप से बढ़ जाएगा।
