बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों ने एक और निर्दोष नागरिक को अपनी हिंसा का शिकार बनाया है। बीती रात बासागुड़ा थाना क्षेत्र के तिम्मापुर गांव में नक्सलियों ने आंगनबाड़ी सहायिका लक्ष्मी की बेरहमी से हत्या कर दी। यह घटना सीआरपीएफ कैंप से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर हुई, जो सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है।
घटना का विवरण
रात करीब 8 बजे नक्सली लक्ष्मी के घर पहुंचे और उन्हें बाहर बुलाकर उनके बेटे के सामने धारदार हथियार से गला रेत दिया। जब लक्ष्मी के बेटे ने मां को बचाने की कोशिश की, तो हमलावरों से उसकी हाथापाई भी हुई, लेकिन वह उन्हें रोकने में असफल रहा। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू कर दी।
कायराना हरकत और आरोप
नक्सलियों ने इस हत्या की जिम्मेदारी मद्देड एरिया कमेटी के नाम से ली है। एक पर्चा जारी कर उन्होंने लक्ष्मी पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाया है। इस हत्या ने न केवल लक्ष्मी के परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है, बल्कि पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
प्रशासन का बयान
एडिशनल एसपी चंद्रकांत गवर्ना ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, “यह एक नृशंस घटना है। पुलिस नक्सलियों की इस कायराना हरकत का कड़ा जवाब देगी। मामले की जांच तेजी से की जा रही है।”
इलाके में दहशत और असुरक्षा
यह घटना बीजापुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ते खतरों को उजागर करती है। इस तरह की घटनाएं ग्रामीणों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं। नक्सलियों द्वारा निर्दोष नागरिकों को पुलिस मुखबिरी के नाम पर निशाना बनाना उनकी क्रूर मानसिकता को दर्शाता है।
पीड़ित परिवार की हालत
लक्ष्मी के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। खासकर उनका बेटा, जो इस दर्दनाक घटना का गवाह बना, गहरे सदमे में है। प्रशासन और समाज से पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा की उम्मीद है।
सवाल जो खड़े होते हैं
- सीआरपीएफ कैंप के इतने करीब ऐसी घटना कैसे हुई?
- क्या नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है?
- क्या पुलिस और प्रशासन इन निर्दोष हत्याओं को रोकने में सक्षम हैं?
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। प्रशासन ने ग्रामीणों से नक्सलियों के खिलाफ सहयोग की अपील की है और उनके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम का वादा किया है। ऐसी घटनाएं न केवल निर्दोषों की जान लेती हैं, बल्कि समाज को भी झकझोर कर रख देती हैं। समाज को एकजुट होकर नक्सलियों की इस हिंसा के खिलाफ खड़ा होना होगा। पुलिस और प्रशासन को सशक्त बनाने के लिए लोगों का सहयोग जरूरी है।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना अब भी एक बड़ी चुनौती है।
