
- वकीलों को ऐसे मामलों में लेटर भेजना होगा
- 6 महीने का होगा जस्टिस खन्ना का कार्यकाल
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में वकील अब किसी मामले की तत्काल लिस्टिंग और सुनवाई ओरली (मौखिक) नहीं करा सकेंगे। नए सीजेआई संजीव खन्ना ने मंगलवार को कहा कि वकीलों से इसके लिए ईमेल या रिटन लेटर भेजा होगा। दरअसल, सीजेआई ने ज्यूडिशियल रिफोर्म के लिए सिटीजन सेंट्रिक एजेंडे की रूपरेखा तैयार की है। सीजेआई खन्ना ने कहा- तत्काल सुनवाई के लिए अब तक वकील सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच के सामने मौखिक अपील कर रहे हैं, यह अब नहीं होगा। वकीलों को ईमेल भेजकर या पत्र देकर यह बताना होगा कि केस की अर्जेंट लिस्टिंग और हियरिंग क्यों जरूरी है।
जस्टिस संजीव खन्ना ने 11 नवंबर को देश के 51वें चीफ जस्टिस की शपथ ली थी। राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शपथ दिलाई थी। चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर्ड हो चुके हैं। जस्टिस खन्ना का सीजेआई के रूप में कार्यकाल सिर्फ 6 महीने का होगा। 64 साल के जस्टिस खन्ना 13 मई 2025 को रिटायर होंगे। सुप्रीम कोर्ट जज के तौर पर जस्टिस खन्ना ने 65 फैसले लिखे हैं। इस दौरान वे करीब 275 बेंचों का हिस्सा रहे हैं। जस्टिस संजीव के चाचा जस्टिस हंसराज खन्ना भी सुप्रीम कोर्ट में जज थे।
हालांकि, इंदिरा सरकार के इमरजेंसी का विरोध करने पर उन्हें सीनियर होने के बावजूद चीफ जस्टिस नहीं बनाया गया। उनकी जगह जस्टिस एमएच बेग को उखक बना दिया गया। जस्टिस हंसराज ने इसका विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट जज से इस्तीफा दे दिया था।बता दें कि पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने ही 17 अक्टूबर को केंद्र सरकार से जस्टिस संजीव खन्ना को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करने की सिफारिश की थी। उस सिफारिश पर मोदी सरकार ने अपनी मुहर लगा दी थी। जस्टिस संजीव खन्ना ने जस्टिस चंद्रचूड़ के रिटायरमेंट के एक दिन बाद यानी 11 नवंबर को कार्यभार संभाला। पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ दो साल तक भारतीय न्यायपालिका के शीर्ष पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने कई अहम फैसले किए।
