रायपुर और दुर्ग के साइबर सेल में पदस्थ आधा दर्जन अधिकारी-कर्मचारियों को भी समंस जारी हुआ है, जिन्होंने तकनीकी जांच की है। या फिर आरोपियों को पकड़ने वाली टीम में शामिल रहे हैं। तत्कालीन साइबर सेल प्रभारियों से भी पूछताछ की तैयारी है।
इधर जिन आईपीएस, एएसपी, टीआई से लेकर हवलदार-सिपाही के यहां छापा पड़ा था, उनसे सीबीआई लगातार पूछताछ कर रही है। एक सीनियर आईपीएस से 5 घंटे पूछताछ की गई। दूसरे आईपीएस को दो घंटे में ही पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। एएसपी और टीआई से 6-6 घंटे तक बैठाकर रखा गया है। बैंक का ट्रांजेक्शन दिखाकर लेन-देन की जानकारी ली गई।
एक आईपीएस से मॉल और होटल का बिल दिखाकर पूछा गया कि उसका पेमेंट कौन किया है? फ्लाइट की टिकट किसने कराई है? क्योंकि अधिकारी ने अधिकांश जगह खुद पेमेंट नहीं किया है। किसी दूसरे व्यक्ति ने उनके रूकन, खाने और शॉपिंग का पेमेंट किया है। सीबीआई की टीम रायपुर के एक मॉल की भी जानकारी जुटा रही है। यहां एक अधिकारी ने खूब खरीदारी की है। उनके नाम से सामान का बिल तो है, लेकिन पेमेंट उनके खाते से नहीं हुआ है।
