ओडिशा (Odisha) में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियानों में सुरक्षाबलों को एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण कामयाबी मिली है। राज्य सरकार की प्रभावी ‘आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति’ (Surrender and Rehabilitation Policy) से प्रभावित होकर कई खूंखार माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला किया है। ताज़ा ‘Odisha Maoist surrender’ (ओडिशा माओवादी सरेंडर) की इस बड़ी घटना ने इलाके में वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) की कमर तोड़ दी है और इसे राज्य में स्थायी शांति बहाली की दिशा में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
Odisha Maoist surrender: सुरक्षाबलों (Security Forces) का बढ़ता दबाव
ओडिशा पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के लगातार और आक्रामक सर्च ऑपरेशन्स के कारण जंगलों में छिपे नक्सलियों के नेटवर्क पर भारी दबाव बन गया था। ताज़ा ‘Odisha Maoist surrender’ रिपोर्ट के अनुसार, जनाधार खिसकने और पुलिस की बढ़ती सख्ती के चलते इन माओवादियों ने प्रशासन के सामने अपने हथियार डाल दिए। विशेष बात यह है कि इनमें से कुछ नक्सलियों पर राज्य सरकार ने भारी नकद इनाम (Cash Reward) भी घोषित कर रखा था।
पुनर्वास नीति (Rehabilitation Policy) का दिखा असर
इन भटके हुए नक्सलियों का समाज की मुख्यधारा (Mainstream) में लौटना ओडिशा सरकार की नीतियों की एक बड़ी सफलता है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सरेंडर करने वाले इन लोगों को समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए नियमत: आर्थिक सहायता, घर और कौशल विकास (Skill Development) के अवसर मुहैया कराए जाएंगे।
नक्सल संगठन (Naxal Network) को लगा करारा झटका
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन कैडर्स के सरेंडर से माओवादी संगठन मनोवैज्ञानिक और जमीनी दोनों स्तरों पर कमजोर पड़ा है। इनसे पूछताछ में पुलिस को नक्सल नेटवर्क की फंडिंग और हथियारों की सप्लाई चेन को लेकर कई अहम खुफिया जानकारियां (Intelligence Inputs) भी मिलने की प्रबल संभावना है।
