Bihar News: रोहतास के कछवां गांव में गहराया जल संकट, एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण

Rohtas Water Crisis

Rohtas Water Crisis:बिहार के रोहतास (Rohtas) जिले से पीने के पानी को लेकर एक बेहद ही चिंताजनक और रुला देने वाली ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई है। विकास और ‘हर घर नल का जल’ जैसी सरकारी योजनाओं के दावों के बीच रोहतास के कछवां गांव (Kachhwan Village) की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहां के ग्रामीण भीषण गर्मी में एक-एक बूंद शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं। पानी की यह किल्लत इतनी ज्यादा है कि इसने ग्रामीणों की पूरी दिनचर्या और जीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है।

सूख गए जलस्रोत, नल-जल योजना ने भी तोड़ा दम

कछवां गांव में जल संकट रातों-रात पैदा नहीं हुआ है, बल्कि यह प्रशासनिक अनदेखी का नतीजा है।

  • गांव के ज्यादातर सरकारी और निजी चापाकल (Handpumps) या तो सूख चुके हैं या फिर खराब पड़े हैं।
  • सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी ‘नल-जल योजना’ भी इस गांव में पूरी तरह से फेल साबित हो रही है। पाइपलाइन बिछी होने के बावजूद नलों से पानी की एक बूंद नहीं टपकती है।
  • भूजल स्तर (Groundwater Level) लगातार नीचे जा रहा है, जिससे बचे-खुचे जलस्रोत भी अब दम तोड़ रहे हैं।

कोसों दूर से पानी ढोने की मजबूरी

इस विकराल समस्या का सबसे बड़ा खामियाजा गांव की महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

  • चिलचिलाती धूप में महिलाओं को सिर पर बर्तन रखकर 1 से 2 किलोमीटर दूर जाकर खेतों या दूसरे इलाकों से पानी लाना पड़ रहा है।
  • कई बार पानी के लिए ग्रामीणों के बीच आपसी विवाद और झड़प की नौबत भी आ जाती है, क्योंकि सीमित जलस्रोतों पर भीड़ बहुत ज्यादा होती है।

दूषित पानी पीने से बीमारियों का खतरा बढ़ा

रोहतास जिले के कई इलाकों में पानी में फ्लोराइड (Fluoride) और अन्य रसायनों की मात्रा अधिक पाई जाती है। कछवां गांव के जो गिने-चुने चापाकल पानी दे भी रहे हैं, उनका पानी पीने लायक नहीं है। मजबूरी में ग्रामीण इसी दूषित और पीले पानी का सेवन कर रहे हैं। दूषित पानी पीने की वजह से गांव में पेट संबंधी बीमारियां, डायरिया और हड्डियों की कमजोरी (फ्लोरोसिस) जैसी स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से पांव पसार रही हैं।

प्रशासन से गुहार, लेकिन समाधान का इंतजार

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन, मुखिया और पीएचईडी (PHED) विभाग के अधिकारियों से इस पेयजल समस्या की शिकायत की है। लेकिन आश्वासनों के अलावा उन्हें अब तक कुछ नहीं मिला है। न तो गांव में नियमित रूप से पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं और न ही खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत की जा रही है। अगर समय रहते प्रशासन ने इस गांव की सुध नहीं ली, तो आने वाले दिनों में यहां जल संकट एक बड़ी त्रासदी का रूप ले सकता है।