रायपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर की चुनाव याचिका एक बार फिर चर्चा में है। इस बार इसकी वजह स्वयं मामला नहीं, बल्कि चुनावी मामलों के निपटारे में हो रही देरी पर मद्रास हाई कोर्ट की टिप्पणी है।
मद्रास हाई कोर्ट ने एक चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव संबंधी मामलों में वर्षों तक फैसले लंबित रहना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। अदालत ने इस संदर्भ में मोहम्मद अकबर की उस याचिका का उल्लेख किया, जिसकी सुनवाई और अंतिम निर्णय में लंबा समय लगा।
अदालत ने कहा कि जब चुनावी विवादों पर फैसला आने तक संबंधित विधानसभा या लोकसभा का कार्यकाल ही समाप्त हो जाए, तो न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य काफी हद तक प्रभावित हो सकता है। न्यायालय के अनुसार ऐसी स्थिति में मतदाताओं और उम्मीदवारों, दोनों के लिए समय पर न्याय सुनिश्चित करना चुनौती बन जाता है।
मोहम्मद अकबर ने अपने चुनाव को लेकर कानूनी चुनौती दी थी। हालांकि, मामला लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया में रहा। मद्रास हाई कोर्ट ने इसी तरह के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव याचिकाओं का निपटारा कानून में निर्धारित समयसीमा के अनुरूप होना चाहिए।
अदालत की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश में चुनावी सुधारों और न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने को लेकर बहस जारी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मोहम्मद अकबर जैसे मामलों का उल्लेख यह दर्शाता है कि चुनावी न्याय में देरी केवल किसी एक उम्मीदवार का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा व्यापक प्रश्न है।
