Ramalinga Reddy Resign:कर्नाटक (Karnataka) की राजनीति में एक बार फिर से भारी उथल-पुथल मच गई है। डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के नेतृत्व वाली सरकार में उस वक्त बड़ा संकट खड़ा हो गया, जब कांग्रेस के बेहद वरिष्ठ नेता और मंत्री रामलिंगा रेड्डी (Ramalinga Reddy) ने अपने पद से इस्तीफा (Resignation) दे दिया। सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा विवाद अहम ‘बेंगलुरु विकास’ (Bangalore Development) मंत्रालय के आवंटन को लेकर शुरू हुआ है।
क्या है इस्तीफे की मुख्य वजह?
रामलिंगा रेड्डी कर्नाटक कांग्रेस के एक कद्दावर नेता माने जाते हैं और बेंगलुरु शहर में उनका काफी दबदबा है।
- मंत्रालय की मांग: रेड्डी लंबे समय से ‘बेंगलुरु विकास’ पोर्टफोलियो की मांग कर रहे थे, क्योंकि वे शहर की बुनियादी संरचना और विकास परियोजनाओं का नेतृत्व करना चाहते थे।
- डीके शिवकुमार का एकाधिकार: हालांकि, डीके शिवकुमार ने यह महत्वपूर्ण विभाग अपने ही पास रखा हुआ था और वे इसे किसी अन्य नेता को सौंपने के पक्ष में नहीं थे।
- नाराजगी और इस्तीफा: बार-बार गुहार लगाने और हाईकमान से चर्चा के बावजूद जब उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो नाराज होकर रामलिंगा रेड्डी ने मंत्रिमंडल से अपना इस्तीफा सौंप दिया।
डीके शिवकुमार सरकार के लिए बड़ा झटका
रेड्डी का इस्तीफा डीके शिवकुमार सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
- बेंगलुरु पर प्रभाव: रामलिंगा रेड्डी का बेंगलुरु के कई विधायकों और स्थानीय निकाय (BBMP) के नेताओं पर गहरा प्रभाव है। उनके इस कदम से पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष खुलकर सामने आ गया है।
- विपक्ष को मिला मुद्दा: इस अंदरूनी कलह से विपक्षी दलों को सरकार पर निशाना साधने का एक बड़ा मौका मिल गया है।
अब सबकी निगाहें कांग्रेस हाईकमान पर टिकी हैं कि क्या वे रामलिंगा रेड्डी को मनाने में कामयाब होंगे या कर्नाटक में यह सियासी संकट और गहराएगा।
