TMC Crisis: 58 विधायकों की बगावत के बाद ममता बनर्जी के साथ बचे सिर्फ 8 विधायक! कई सांसदों ने भी बनाई दूरी

TMC Split Bengal

TMC Split Bengal:कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे घमासान और ऐतिहासिक विभाजन के बाद अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के खेमे में भारी अकेलापन नजर आने लगा है। बुधवार को ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) के नेतृत्व में पार्टी के 58 बागी विधायकों द्वारा अलग गुट बनाने और विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता मिलने के बाद, ममता बनर्जी के साथ खड़े विधायकों की संख्या बेहद कम रह गई है। ताजा घटनाक्रम के मुताबिक, इस बड़े राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ केवल आठ (8) विधायक ही एकजुट दिखाई दिए हैं, जबकि पार्टी के कई लोकसभा और राज्यसभा सांसदों (MPs) ने भी इस पूरे विवाद से खुद को दूर कर लिया है।

ममता बनर्जी के वफादार: कौन हैं वो 8 विधायक?

पार्टी में मची इस महा-बगावत के बावजूद कुछ दिग्गज नेताओं और विधायकों ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी बनाए रखी है। मुख्यमंत्री के साथ मजबूती से खड़े दिखने वाले इन 8 प्रमुख चेहरों में शामिल हैं:

  1. अरूप बिस्वास (Aroop Biswas)
  2. शोभनदेव चट्टोपाध्याय (Sobhandeb Chattopadhyay)
  3. चंद्रिमा भट्टाचार्य (Chandrima Bhattacharya)
  4. राजीव बनर्जी (Rajib Banerjee)
  5. स्नेहाशीष चक्रवर्ती (Snehasis Chakraborty)
  6. बीरबाहा हांसदा (Birbaha Hansda)
  7. अशोक देब (Ashoke Deb)
  8. अतुल मंडल (Atul Mondal)

इन नेताओं ने साफ किया है कि वे हर परिस्थिति में ममता बनर्जी के नेतृत्व और मूल तृणमूल कांग्रेस के साथ बने रहेंगे।

सांसदों की चुप्पी और दूरी ने बढ़ाई टेंशन

इस सियासी संकट में ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय पार्टी के सांसदों का रुख बना हुआ है।

  • सांसदों ने बनाई दूरी: खबरों के मुताबिक, टीएमसी के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली सांसदों ने फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है और खुद को कोलकाता के इस सियासी ड्रामे से दूर कर लिया है।
  • पार्टी पर कब्जे की लड़ाई: बागी गुट को असली टीएमसी के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए विधानसभा में तो दो-तिहाई बहुमत मिल चुका है, लेकिन चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक उन्हें कुल लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के भी दो-तिहाई समर्थन (28 में से कम से कम 19 लोकसभा सांसद) की आवश्यकता होगी। ऐसे में कई सांसदों का इस तरह दूरी बनाए रखना ममता बनर्जी के साथ-साथ बागी गुट के लिए भी सस्पेंस बढ़ा रहा है।

कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम को लेकर अभी भी सस्पेंस

इसके अलावा, कोलकाता के मेयर और ममता बनर्जी के बेहद खास सिपहसालार रहे फिरहाद हकीम (Firhad Hakim) को लेकर भी असमंजस की स्थिति बरकरार है। हालांकि वे बुधवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में शामिल हुए थे, जिसके बाद उनके इस्तीफे और पाला बदलने की अटकलें तेज थीं, लेकिन वे ममता बनर्जी के साथ खुलकर खड़े रहने वाले इन 8 विधायकों की सूची में फिलहाल स्पष्ट रूप से नजर नहीं आए हैं।

ममता बनर्जी द्वारा संगठन की सभी कमेटियों को भंग किए जाने के बाद, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे इन बचे हुए वफादार नेताओं के दम पर अपनी पार्टी और सरकार को इस संकट से कैसे बाहर निकालती हैं।