Chhattisgarh Paddy Farming:रायपुर। भारत में ‘धान का कटोरा’ (Rice Bowl) कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कृषि के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक किस्मों के साथ-साथ राज्य के किसान अब मुनाफा बढ़ाने के लिए बासमती (Basmati) और अन्य सुगंधित धान की किस्मों की जैविक खेती की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। कृषि विभाग की नई पहलों और केंद्र सरकार के सहयोग से इन प्रीमियम किस्मों को अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
सुगंधित धान और जैविक खेती पर जोर
यूं तो छत्तीसगढ़ में भारी मात्रा में गैर-बासमती चावल का उत्पादन होता है और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में बासमती धान का उत्पादन कुल उत्पादन का करीब 6 प्रतिशत ही है।
- सुगंधित किस्में: इसके बावजूद, राज्य में पैदा होने वाले ‘लोहंदी विष्णु भोग’, ‘जीराफूल’ और ‘नगरी दुबराज’ जैसे सुगंधित चावल की भारी मांग है।
- जैविक खेती: कृषि विभाग लगातार इन सुगंधित किस्मों की जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा दे रहा है।
- फायदे: जैविक खेती से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधर रही है, बल्कि रासायनिक खादों के उपयोग में कमी आने से किसानों का खर्च भी बच रहा है।
रायपुर में APEDA कार्यालय, एक्सपोर्ट को मिलेगा बूस्ट
छत्तीसगढ़ के किसानों की आय बढ़ाने और उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है।
- नया क्षेत्रीय कार्यालय: हाल ही में रायपुर में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के क्षेत्रीय कार्यालय का विधिवत उद्घाटन किया गया है।
- जीआई टैग उत्पादों का निर्यात: इस कार्यालय की मदद से छत्तीसगढ़ के जीआई टैग (GI-tagged) वाले विशेष चावल जैसे जीराफूल (Jeeraphool) और नगरी दुबराज (Nagri Dubraj) के साथ-साथ प्रीमियम नॉन-बासमती चावल का एक्सपोर्ट सीधा विदेशों में किया जा सकेगा।
धान खरीदी के नियम और किसानों को अच्छे दाम
राज्य सरकार भी किसानों को सशक्त बनाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीदी नीतियों में महत्वपूर्ण सुधार कर रही है।
बाजार में तेजी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात मांग मजबूत होने के कारण बासमती और सुगंधित चावल के भाव काफी अच्छे चल रहे हैं, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ हो रहा है।
खरीदी का लक्ष्य और सीमा: खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए राज्य शासन ने 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है। किसानों से धान खरीदी की अधिकतम सीमा 21 क्विंटल प्रति एकड़ (लिंकिंग सहित) निर्धारित की गई है।
