President Rule in Bengal:कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में नई सरकार के गठन के बाद राजनीतिक हिंसा का दौर एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। हाल ही में राज्य में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए कथित हमलों के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल से करीब दो हजार किलोमीटर दूर महाराष्ट्र की विपक्षी पार्टी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ (Saamana) में प्रकाशित एक कड़े संपादकीय में राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए बंगाल में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) लागू करने की मांग की गई है।
TMC सांसदों पर हुए जानलेवा हमले
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड बहुमत (208 सीटों) हासिल कर 15 साल पुरानी ममता बनर्जी सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया है और शुभेंदु अधिकारी राज्य के नए मुख्यमंत्री बने हैं। हालांकि, चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है:
- अभिषेक बनर्जी पर हमला: दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में डायमंड हार्बर से टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर शनिवार को एक उग्र भीड़ ने पत्थर और अंडे फेंके।
- कल्याण बनर्जी घायल: रविवार को हुगली जिले में एक पुलिस स्टेशन के बाहर भीड़ द्वारा किए गए हमले में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के सिर में गंभीर चोटें आई हैं।
सामना के संपादकीय में भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार
शिवसेना (UBT) ने ‘बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करो’ शीर्षक वाले संपादकीय में भाजपा और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
- गुंडों को खुली छूट: सामना में आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा नीत सरकार ने गुंडों को खुली छूट दे दी है और वह विपक्षी दल के जन प्रतिनिधियों को मारना चाहती है।
- हमले भाजपा प्रायोजित: शिवसेना का दावा है कि चूंकि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari) और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एन रवि (Governor N Ravi) ने इस हमले पर कोई बयान नहीं दिया है, इसका मतलब है कि ये “जानलेवा” हमले भाजपा द्वारा प्रायोजित थे।
- लोकतंत्र पर प्रहार: संपादकीय के अनुसार, यह हमला केवल पश्चिम बंगाल की प्रतिष्ठा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा झटका है। पार्टी ने कहा कि राज्य में सत्ता परिवर्तन निष्पक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया से नहीं हुआ है, बल्कि भाजपा ने चुनावी कदाचार और 3 लाख से अधिक अर्धसैनिक बलों की तैनाती का दुरुपयोग किया।
शिवसेना का तंज: सामना में कहा गया है कि अगर ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहते ऐसे हमले हुए होते, तो पश्चिम बंगाल के राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर देते। भाजपा अपने प्रतिशोध की भूख मिटाने के लिए सत्ता का दुरुपयोग कर रही है।
इस संपादकीय ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
