CG Liquor Industry Investigation: छत्तीसगढ़ की सभी शराब फैक्ट्रियों की होगी जांच, 30 दिनों के भीतर मांगी गई रिपोर्ट

Liquor factories in Chhattisgarh to be investigated

Liquor factories in Chhattisgarh to be investigated:रायपुर। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बहुचर्चित शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बीच अब राज्य सरकार और आबकारी विभाग (Excise Department) ने भी एक बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शासन के निर्देशों के परिपालन में आबकारी विभाग ने प्रदेश में संचालित होने वाली सभी शराब फैक्ट्रियों (डिस्टिलरीज और ब्रुअरीज) की व्यापक जांच करने का एक बड़ा फैसला लिया है। इस उच्च स्तरीय जांच के लिए विशेष जांच दलों (Investigation Teams) का गठन किया गया है, जिन्हें अगले 30 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

सभी डिस्टिलरीज की होगी सघन कोना-कोना जांच

आबकारी आयुक्त द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के मुताबिक, इस जांच का मुख्य उद्देश्य शराब उत्पादन और वितरण की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता को रोकना है।

  • जांच के मुख्य बिंदु: जांच दल इन फैक्ट्रियों में कच्चे माल (Spirits/Malt) की आवक, उत्पादन की वास्तविक क्षमता, स्टॉक रजिस्टरों का मिलान, और राजस्व (Excise Duty) के भुगतान से जुड़े सभी दस्तावेजों की कड़ाई से स्क्रूटनी करेंगे।
  • शराब घोटाले के बाद बड़ी कार्रवाई: राज्य में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुए हजारों करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले की पृष्ठभूमि को देखते हुए इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आबकारी व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लूपहोल या अवैध सिंडिकेट के लिए कोई जगह न बचे।

30 दिनों की समय-सीमा और सख्त निर्देश

आबकारी विभाग ने इस पूरी जांच प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।

दोषियों पर होगी कार्रवाई: यदि जांच के दौरान किसी भी शराब फैक्ट्री में नियमों का उल्लंघन, अवैध उत्पादन या टैक्स चोरी का कोई भी मामला सामने आता है, तो संबंधित फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी और उनके लाइसेंस भी रद्द किए जा सकते हैं। इस आदेश के बाद से प्रदेश के शराब उद्योग से जुड़े कारोबारियों में भारी हड़कंप मचा हुआ है।

समय-सीमा तय: जांच अधिकारियों को साफ तौर पर निर्देशित किया गया है कि वे बिना किसी ढिलाई के सभी फैक्ट्रियों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) पूरा करें और 30 दिनों के भीतर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपें।