छत्तीसगढ़ विधानसभा (Chhattisgarh Assembly) के बजट सत्र में आज महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े मुद्दे पर ज़ोरदार बहस हुई। सदन में Bastar Anganwadi centers issue (बस्तर आंगनवाड़ी केंद्रों का मुद्दा) पूरी प्रमुखता के साथ गूंजा। विपक्ष ने आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बस्तर में भवनविहीन आंगनवाड़ी केंद्रों की दयनीय स्थिति को लेकर विभागीय मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े (Lakshmi Rajwade) को जमकर घेरा। बच्चों के पोषण और बुनियादी ढांचे से जुड़े इस गंभीर विषय पर सदन का माहौल काफ़ी गर्म रहा।
Bastar Anganwadi centers issue: ज़मीनी हक़ीक़त पर उठे सवाल
प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी विधायकों ने आंकड़ों का हवाला देते हुए पूछा कि बस्तर जैसे संवेदनशील और दूरस्थ इलाक़ों में आज भी सैकड़ों आंगनवाड़ी केंद्र बिना किसी पक्के भवन के पेड़ों के नीचे या जर्जर झोपड़ियों में क्यों संचालित हो रहे हैं। Bastar Anganwadi centers issue को उठाते हुए सदस्यों ने कहा कि इससे नौनिहालों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली स्वास्थ्य और पोषण (Nutrition) सुविधाओं पर सीधा और नकारात्मक असर पड़ रहा है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े (Minister Lakshmi Rajwade) का जवाब
विपक्ष के इन तीखे सवालों का जवाब देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ जगहों पर भवनों की कमी है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि नई इमारतों के निर्माण के लिए बजट में समुचित वित्तीय प्रावधान (Financial Allocation) किए गए हैं। मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि बस्तर संभाग में भवन निर्माण के काम को जल्द ही प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।
आदिवासी इलाक़ों (Tribal Areas) में कुपोषण की चुनौती
बस्तर में आंगनवाड़ी केंद्रों की यह स्थिति सीधे तौर पर कुपोषण (Malnutrition) से लड़ने की राज्य सरकार की मुहिम को प्रभावित करती है। इस चर्चा से यह स्पष्ट हो गया है कि सदन आदिवासी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे और लोक-कल्याणकारी योजनाओं को लेकर पूरी तरह से सजग है। प्रशासन को अब ज़मीनी स्तर पर इन घोषणाओं को तुरंत लागू करना होगा।
