छत्तीसगढ़ विधानसभा (Chhattisgarh Assembly) के बजट सत्र में एक बार फिर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। ताज़ा Korba rice purchase scam (कोरबा राइस परचेज़ स्कैम) ने सदन में भारी हंगामा खड़ा कर दिया है। कोरबा ज़िले में अधिकारियों की कथित मिलीभगत से हुई अमानक चावल की ख़रीदी (Rice Purchase) का मुद्दा विपक्ष ने ज़ोर-शोर से उठाया। इस बड़े और चौंकाने वाले घोटाले को लेकर विभागीय मंत्री को सदन में स्पष्टीकरण देना पड़ा, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
Korba rice purchase scam: अधिकारियों की मिलीभगत से बड़ा घोटाला
प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी विधायकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कोरबा ज़िले में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कस्टम मिलर्स की सांठगांठ से नियमों को ताक पर रखकर ख़राब गुणवत्ता वाले चावल की ख़रीदी की गई है। इस Korba rice purchase scam ने सरकारी ख़ज़ाने को भारी नुक़सान पहुंचाया है और साथ ही ग़रीबों के हक़ पर डाका डाला है। विधायकों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की।
सदन में मंत्री (Minister) का स्पष्ट जवाब
विपक्ष के तीखे सवालों और बढ़ते दबाव के बीच, संबंधित विभागीय मंत्री ने सदन में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने इस गड़बड़ी को गंभीरता से लेते हुए बताया कि मामले की शुरुआती जांच में दो अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि इन दोनों अधिकारियों पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई (Administrative Action) की जा रही है और भ्रष्टाचार को किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पारदर्शी व्यवस्था (Transparent System) की सख़्त ज़रूरत
विधानसभा में गूंजे इस धान और चावल घोटाले ने राज्य की उपार्जन नीति और मॉनिटरिंग पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब शासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती ज़मीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को मज़बूत करना है ताकि भविष्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में इस तरह की धांधली को पूरी तरह से रोका जा सके।
