CG Liquor Scam: 3200 करोड़ के शराब घोटाले में अरुणपति त्रिपाठी पर CBI की FIR, 38 लाख से करोड़ों में पहुंची संपत्ति

CG Liquor Scam

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बहुत बड़ा एक्शन लिया है। सीबीआई ने इस घोटाले में पहली बार आय से अधिक संपत्ति (DA) अर्जित करने का मामला दर्ज किया है। यह एफआईआर भारतीय दूरसंचार सेवा के अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी और उनकी पत्नी मंजुला त्रिपाठी के खिलाफ दर्ज की गई है। अरुणपति त्रिपाठी कांग्रेस शासनकाल के दौरान छत्तीसगढ़ में प्रतिनियुक्ति पर थे और आबकारी विभाग के विशेष सचिव और एमडी के पद पर तैनात थे।

38 लाख से 3.32 करोड़ तक पहुंचा संपत्ति का ग्राफ

सीबीआई की इस एफआईआर में चौंकाने वाले वित्तीय खुलासे हुए हैं, जो बताते हैं कि कैसे एक सरकारी अफसर ने अपनी कुर्सी का फायदा उठाकर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया।

  • दरअसल, जांच में यह बात सामने आई है कि त्रिपाठी और उनकी पत्नी ने अपनी वैध आय के स्रोतों से कहीं ज्यादा, करीब 4.91 करोड़ रुपये की संपत्ति अवैध रूप से जमा की है। यह उनकी असली कमाई से 54.53 प्रतिशत अधिक है।
  • साल 2013 में जब त्रिपाठी की संपत्ति का आकलन हुआ था, तब उनके पास कुल 38.08 लाख रुपये की संपत्ति थी।
  • हालांकि, दिसंबर 2023 तक आते-आते उनकी यही संपत्ति कई गुना बढ़कर 3.32 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

कमाई से ज्यादा खर्च, विदेश और रियल एस्टेट में भारी निवेश

इस घोटाले की जांच कर रहे अधिकारियों ने जब त्रिपाठी के वित्तीय लेन-देन को खंगाला, तो आमदनी से ज्यादा खर्च का एक बड़ा अंतर सामने आया।

  • एफआईआर के मुताबिक, जांच अवधि के दौरान त्रिपाठी दंपति ने कुल 9.00 करोड़ रुपये की आय घोषित की थी।
  • इसके विपरीत, उनका कुल खर्च 10.97 करोड़ रुपये पाया गया।
  • इसके अलावा, इस अवैध कमाई को ठिकाने लगाने के लिए त्रिपाठी ने रायपुर के पॉश इलाके लाभांडी में एक आलीशान फ्लैट और नया रायपुर के गोल्फ कोर्स इलाके में एक प्रीमियम प्रॉपर्टी खरीदी। दुर्ग और भिलाई में भी जमीन के कई बड़े सौदे किए गए, साथ ही विदेशी निवेश और म्यूचुअल फंड में भी करोड़ों रुपये लगाए गए।

70 अन्य रसूखदार अधिकारियों पर भी लटकी तलवार

अरुणपति त्रिपाठी को इस मामले में पहले ही ईडी (ED) और ईओडब्ल्यू (EOW) गिरफ्तार कर चुकी हैं। लेकिन सीबीआई की इस एफआईआर के बाद राज्य के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

  • जांच एजेंसियों के रडार पर अब 30 से अधिक वो अधिकारी और कर्मचारी आ गए हैं, जो इस शराब सिंडिकेट का हिस्सा थे।
  • उम्मीद जताई जा रही है कि ईओडब्ल्यू जल्द ही पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, निरंजन दास और 29 अन्य आबकारी अधिकारियों के खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर सकती है।
  • ईडी भी इस नई एफआईआर के आधार पर एक नया मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज करने की तैयारी में है।