Naxalism Update: नक्सल मोर्चे पर बड़ी कामयाबी, 47 नक्सलियों ने एक साथ किया सरेंडर, दहल उठा संगठन

Naxalites Surrender

Naxalites Surrender:छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) और तेलंगाना (Telangana) के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हाथ लगी है। लाल आतंक की कमर तोड़ते हुए एक साथ 47 खूंखार माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया है। इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों के हथियार डालने से पूरे माओवादी संगठन में हड़कंप मच गया है। सुरक्षा एजेंसियां इस सामूहिक सरेंडर को नक्सल इकोसिस्टम के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका मान रही हैं। इस घटना के बाद से खूंखार मानी जाने वाली ‘दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी’ (DVC) लगभग खात्मे की कगार पर पहुंच गई है।

2 बड़े नक्सली कमांडरों ने की सरेंडर की अगुवाई

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह सरेंडर इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि इसकी कमान नक्सल संगठन के 2 बेहद खूंखार और इनामी नेताओं ने संभाली थी।

  • पहले बड़े नेता का नाम हेमला आयथु उर्फ विज्जा है, जो दक्षिण बस्तर डीवीसी (DVC) का प्रभारी है और इलाके में कई बड़ी वारदातों का मास्टरमाइंड रहा है।
  • दूसरे बड़े नक्सली का नाम पोडियम लाचू उर्फ मनोज है। मनोज माओवादियों की खतरनाक ‘9वीं बटालियन’ का कमांडर है। इन दोनों बड़े चेहरों के मुख्यधारा में लौटने से नक्सलियों का पूरा नेटवर्क चरमरा गया है।

सरेंडर करने वाले 47 माओवादियों का पूरा प्रोफाइल

इस सामूहिक आत्मसमर्पण में संगठन के कई ऊंचे स्तर के पदाधिकारी और कैडर शामिल हैं। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 47 नक्सलियों का प्रोफाइल कुछ इस प्रकार है:

  • 1 एससीएम (SCM) स्तर का बड़ा नेता
  • 3 डीवीसीएम (DVCM) या CyPCM स्तर के वरिष्ठ सदस्य
  • 24 एसीएम (ACM) या पीपीसीएम (PPCM) कैडर के हार्डकोर सदस्य
  • 19 साधारण पार्टी सदस्य (नक्सली कैडर)

संगठन के लिए यह कितना बड़ा झटका है?

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एक साथ 47 लोगों का नेटवर्क से बाहर आना और पुलिस के सामने हथियार डालना इस बात का प्रमाण है कि नक्सलियों के भीतर अब सरकार और सुरक्षा बलों का खौफ बैठ चुका है। विकास कार्यों की पहुंच और पुलिस के लगातार चलाए जा रहे एंटी-नक्सल ऑपरेशंस के कारण भटके हुए युवा अब समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं। इस सरेंडर का सीधा असर दक्षिण बस्तर डीवीसी पर पड़ेगा, जो अब हथियारों और कैडर दोनों की भारी कमी से जूझते हुए खात्मे की कगार पर है।