रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ‘सुशासन’ (Good Governance) को प्राथमिकता दी जा रही है। ‘सुशासन तिहार’ के माध्यम से राज्य सरकार न केवल अपनी कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतार रही है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित कर रही है। प्रदेश का प्रशासनिक ढांचा अब संवेदनशील और जवाबदेह बन गया है।
योजनाओं की सीधी पहुंच और पारदर्शिता मुख्यमंत्री साय की कार्यशैली का मुख्य केंद्र ‘अंतिम व्यक्ति का विकास’ है। ‘सुशासन तिहार’ का उद्देश्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर करना और पारदर्शिता लाना है।
- सरल प्रक्रिया: सरकार ने जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, जिससे लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ उठाने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।
- डिजिटल गवर्नेंस: सीएम हेल्पलाइन और अन्य डिजिटल माध्यमों से जनता की शिकायतों का त्वरित निराकरण हो रहा है, जिससे शासन और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता और मजबूत हुआ है।
जीवन स्तर में सुधार राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं—चाहे वो कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य या महिला सशक्तिकरण से जुड़ी हों—ने निचले स्तर पर लाभार्थियों के जीवन को संवारा है।
- किसानों को खाद, बीज और सही दाम दिलाने से लेकर महिलाओं के लिए ‘महतारी वंदन’ जैसी योजनाओं ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती दी है।
- स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों से सुदूर वनांचल के निवासियों को भी मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
‘नागरिक देवो भव’ की भावना मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का स्पष्ट संदेश है कि अधिकारी ‘शासक’ नहीं बल्कि ‘सेवक’ की भूमिका निभाएं। ‘सुशासन तिहार’ का यही मंत्र है कि हर नागरिक की सुनवाई हो और सरकारी अमला उनके प्रति संवेदनशील रहे। सरकार के इस दृष्टिकोण ने न केवल प्रशासनिक कार्यक्षमता में इजाफा किया है, बल्कि प्रदेश के विकास की रफ्तार को भी तेज किया है।
