नई दिल्ली: अमेरिका (US) और ईरान (Iran) के बीच बीते 4 महीने से चला आ रहा खूनी संघर्ष आखिरकार खत्म हो गया है। दोनों देश एक ऐतिहासिक समझौते पर राजी हो गए हैं, जिस पर शुक्रवार को आधिकारिक मुहर लगने की उम्मीद है।
हालांकि इस डील का आधिकारिक मसौदा अभी जारी नहीं किया गया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान पर लगे कड़े प्रतिबंधों में ढील देते हुए उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) और अन्य ईंधन बेचने की इजाजत दे दी है। यह फैसला भारत समेत कई तेल आयातक देशों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों दी थी तेल बेचने पर पाबंदी?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल (2018) के दौरान ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे।
- ईरान पर परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) विकसित करने और पश्चिम एशिया में विद्रोही गुटों को फंडिंग देने का आरोप था।
- इन प्रतिबंधों के तहत ईरान से तेल व्यापार करने वाले अन्य देशों पर भी कड़े अमेरिकी प्रतिबंध लगाए गए थे, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई थी।
ईरान को माननी होंगी ये कड़ी शर्तें
नए समझौते के तहत ईरान अब अपना तेल और ईंधन का व्यापार फिर से शुरू कर सकेगा। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में एक निश्चित समयसीमा के लिए ईरान से तेल प्रतिबंध हटाने का प्रावधान है।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ईरान को यह ढील तभी मिलेगी, जब वह अमेरिका की 2 प्रमुख शर्तें मानेगा:
- ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में कोई रुकावट पैदा नहीं करेगा।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह छूट ईरान के लिए बहुत बड़ी रियायत है। ओब्सिडियन रिस्क एडवाइजर्स के मुताबिक, ईरान के पास टैंकरों में 10 करोड़ बैरल से ज्यादा का कच्चा तेल भंडार मौजूद है, जिसे बेचकर वह अरबों डॉलर का मुनाफा कमा सकता है।
खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, टलेगा वैश्विक ईंधन संकट
इस समझौते के लागू होते ही अमेरिका ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से अपनी नाकेबंदी हटा लेगा।
- क्या हुआ था? युद्ध शुरू होते ही ईरान और बाद में अमेरिका ने इस अहम समुद्री रास्ते पर घेराबंदी कर दी थी। इससे जहाजों की आवाजाही ठप हो गई और वैश्विक बाजार में हाहाकार मच गया था।
- महत्व: युद्ध से पहले दुनिया भर के तेल व्यापार का 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था। इस रास्ते के बंद होने से भारत समेत तमाम देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया था और तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं।
भारत को क्या होगा फायदा? (Impact on India)
अमेरिका और ईरान के बीच हुई इस नई डील से भारत को कई बड़े आर्थिक और रणनीतिक फायदे होने वाले हैं:
- सस्ता कच्चा तेल: डील की खबर आते ही वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में 4% से अधिक की भारी गिरावट आई है और यह 83 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में यह 80 डॉलर के नीचे भी जा सकता है।
- घटेगा महंगाई का बोझ: तेल सस्ता होने से भारत का विदेशी मुद्रा आयात बिल कम होगा, जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर या कम हो सकती हैं। इसका सीधा असर महंगाई कम होने पर पड़ेगा।
- सस्ता विकल्प: भारतीय रिफाइनरियों को ईरान के रूप में कच्चे तेल का एक नया और सस्ता विकल्प मिलेगा। भविष्य में भारत सीधे ईरान से कम दामों पर कच्चा तेल खरीद सकेगा।
