सीएम हेल्पलाइन 1076 पर 2.45 लाख शिकायतें दर्ज, 85.85% का निराकरण

49 विभागों के 8 हजार अधिकारी जुड़े; 24 घंटे मिलती है शिकायत दर्ज कराने की सुविधा, सीएम ने कहा- केवल पोर्टल पर शिकायत बंद करना नहीं, संतुष्टिपूर्ण समाधान जरूरी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आम लोगों की सरकारी दफ्तरों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 प्रभावी माध्यम बन रही है। इस टोल फ्री नंबर पर अब तक 2 लाख 45 हजार 376 शिकायतें दर्ज की गई हैं।

इनमें से 2 लाख 10 हजार 649 का निराकरण किया जा चुका है। यानी कुल शिकायतों में 85.85 प्रतिशत का समाधान हुआ है। शेष 34 हजार 727 शिकायतों पर कार्रवाई जारी है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हेल्पलाइन और प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट किया कि शिकायतों को सिर्फ पोर्टल पर बंद करना उद्देश्य नहीं होना चाहिए। आम नागरिक को वास्तविक और संतोषजनक समाधान मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनता को अपनी समस्या लेकर दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। अच्छा काम करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि लगातार लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय होगी।

49 विभागों के अधिकारी जुड़े

सीएम हेल्पलाइन का कॉल सेंटर सातों दिन 24 घंटे संचालित होता है। इससे शासन के 49 विभागों के करीब 8 हजार अधिकारी जुड़े हैं। कुल 1195 श्रेणियों में शिकायतों के निराकरण के लिए समय-सीमा तय की गई है। बिजली, राजस्व, जमीन विवाद, नामांतरण, प्रमाणपत्र, राशन कार्ड, पेंशन, पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी समस्याएं यहां दर्ज कराई जा सकती हैं।

शिकायतों पर कार्रवाई के उदाहरण

हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों के बाद कई लोगों को राहत मिली है। जांजगीर-चांपा के भवतरा गांव में देवेंद्र दिनकर का राशन कार्ड सुधारकर दोबारा सक्रिय किया गया। कांकेर के हड़फड़ गांव में खराब सोलर पंप कुछ ही घंटों में ठीक किया गया। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में अवैध रेत और गिट्टी परिवहन पर कार्रवाई कर 8 ट्रैक्टर जब्त किए गए।

महासमुंद के खिरोद कुमार साव को ईवी सब्सिडी की लंबित राशि दिलाई गई। जशपुर में बुजुर्ग त्रिपुरारी शर्मा की वृद्धावस्था पेंशन बहाल हुई, जबकि पेयजल योजना का मोटर बदलने से 200 परिवारों को राहत मिली। सरगुजा की छात्रा आराधना सिंह के आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधारी गई, जिससे उनकी उच्च शिक्षा का रास्ता आसान हुआ।

हेल्पलाइन पर हर शिकायत को यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है। नियमित मॉनिटरिंग से अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होती है। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से प्रशासन और आम जनता के बीच सीधा संवाद मजबूत हुआ है।