ब्राज़ील में दक्षिणपंथी राजनीति को फिर झटका, लुला दा सिल्वा चौथी बार राष्ट्रपति चुने गए

ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में 80 वर्षीय लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने दूसरे चरण में जीत दर्ज कर सत्ता में ऐतिहासिक वापसी की है। उन्होंने ट्रम्प समर्थक फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया।

ब्राजील में 80 वर्षीय लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में जीत हासिल कर एक बार फिर सत्ता में वापसी की है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थक फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया है। पहले चरण में फ्लावियो से पीछे रहने के बावजूद लूला ने दूसरे दौर में मुकाबला अपने पक्ष में कर लिया। हालांकि, राष्ट्रपति बनने के बाद उनके सामने संसद में मजबूत दक्षिणपंथी विपक्ष, बढ़ते सरकारी कर्ज और महंगाई जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।

ब्राजील में 1989 से सीधे राष्ट्रपति चुनाव हो रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, लूला की यह जीत चुनावी इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। ऐसा इसलिए क्योंकि पहले चरण में दूसरे स्थान पर रहने के बाद किसी उम्मीदवार के अंतिम चरण में जीतने का यह पहला मामला बताया गया है। चुनाव के पहले चरण में फ्लावियो बोल्सोनारो को 47 प्रतिशत वोट मिले थे। जबकि, लूला को 45.16 प्रतिशत मतों से संतोष करना पड़ा था। किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिलने के कारण चुनाव दूसरे चरण तक पहुंचा। इस दौर में दोनों शीर्ष उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला हुआ।

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पहले चरण में हारने वाले उम्मीदवारों के समर्थकों को भी अब लूला और फ्लावियो में से किसी एक को चुनना था। इससे चुनाव का समीकरण बदल गया। चुनाव से पहले हुए सर्वे में महिलाओं और कैथोलिक मतदाताओं के बीच लूला को बढ़त दिखाई गई थी। सर्वे के मुताबिक, 49 प्रतिशत महिलाओं ने लूला का समर्थन किया था। जबकि, फ्लावियो के पक्ष में 40 प्रतिशत महिलाएं थी। इसी तरह कैथोलिक मतदाताओं में लूला को 52 प्रतिशत और फ्लावियो को 42 प्रतिशत समर्थन मिलने की बात सामने आई थी। लूला ने अपने प्रचार में ब्राजील की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को अपने फैसले खुद करने चाहिए और अमेरिकी दबाव के बीच अपनी स्वायत्तता बनाए रखनी चाहिए। 

लूला का राजनीतिक जीवन लंबे संघर्ष और उतार चढ़ाव से भरा रहा है। वह 2002 से 2010 तक लगातार दो कार्यकाल के लिए ब्राजील के राष्ट्रपति रहे थे। इसके बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। साल 2018 में भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था। हालांकि, बाद में उनकी सजा रद्द कर दी गई थी। जिससे उनके राजनीतिक जीवन में वापसी का रास्ता खुला। इसके बाद उन्होंने 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज की। उस चुनाव में उन्होंने फ्लावियो बोल्सोनारो के पिता और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को हराया था। अब एक बार फिर जीत के साथ लूला को देश की कमान मिली है। उनके सामने पिछली सरकारों के दौरान बने आर्थिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच अपने चुनावी वादों को लागू करने की चुनौती होगी।

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राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बावजूद लूला के लिए अपने एजेंडे को लागू करना आसान नहीं होगा। ब्राजील की संसद में दक्षिणपंथी दलों की मजबूत मौजूदगी उनके सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है। जायर बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी और उसके सहयोगियों को निचले सदन में 280 से अधिक सीटें और सीनेट में करीब 50 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में लूला सरकार को विधेयक पारित कराने और नीतियों को लागू करने के लिए अन्य दलों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है। सरकारी खर्च, गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता और कारोबार से जुड़े सुधारों जैसे मुद्दों पर सरकार तथा विपक्ष के बीच मतभेद उभरने की आशंका है। विपक्ष की मजबूती के कारण लूला के लिए अपने वादों को पूरा करने के लिए जरूरी राजनीतिक सहमति बनाना महत्वपूर्ण होगा।