रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) राज्य सेवा परीक्षा-2021 में कथित पेपर लीक और चयन में गड़बड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को पहली चार्जशीट दाखिल की है। इसमें तत्कालीन आयोग अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत 7 लोगों को आरोपी बनाया गया है। ED के अनुसार परीक्षा में चयन कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपए की रकम वसूली गई।
चार्जशीट में पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के तत्कालीन OSD चेतन बोरघारिया, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर, तुमगांव के मेडिकल ऑफिसर डॉ. विकास चंद्राकर, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और निजी कंपनी के डायरेक्टर श्रवण गोयल के नाम शामिल हैं। श्रवण गोयल और ललित गणवीर को गिरफ्तार किया जा चुका है।
एक पोस्ट के लिए 60-65 लाख रुपए लेने का आरोप
ED के मुताबिक अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने के नाम पर एक पोस्ट के लिए 60 से 65 लाख रुपए तक का सौदा तय किया गया था। आरोप है कि प्रारंभिक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और इंटरव्यू तक चयन सुनिश्चित कराने का भरोसा दिया गया। एजेंसी को अब तक 3 करोड़ रुपए से अधिक के लेन-देन के साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है।
बारनवापारा रिसॉर्ट में 29 से ज्यादा अभ्यर्थी पहुंचे
जांच में बारनवापारा के एक रिसॉर्ट में 29 से ज्यादा अभ्यर्थियों के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि यहां करीब एक महीने तक मुख्य परीक्षा की तैयारी कराई गई। उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर पर कुछ अभ्यर्थियों से नकद रकम लेने का आरोप है।
ED के अनुसार कुछ अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा से पहले रायपुर के डीडी नगर स्थित सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद बारनवापारा में परीक्षा की तैयारी कराई गई।
प्रभावशाली लोगों के नाम का इस्तेमाल करने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक अभ्यर्थियों का भरोसा जीतने के लिए तत्कालीन सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों के नाम और पद का इस्तेमाल किया गया। उत्कर्ष चंद्राकर पर अपने रिश्तेदार और तत्कालीन मुख्यमंत्री के पीए केके चंद्रवंशी के प्रभाव का हवाला देने का आरोप है। वहीं तत्कालीन CMO OSD चेतन बोरघारिया के पद का भी इस्तेमाल किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
CGPSC-2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच पहले EOW-ACB और बाद में CBI ने की थी। इसी मामले से कथित तौर पर अर्जित रकम और उसके लेन-देन की ED PMLA के तहत जांच कर रही है। एजेंसी अब रकम के आगे के लेन-देन और अन्य संभावित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
