ओमानी को-पायलट ने विमान हाईजैक कर क्रैश करने की कोशिश की; भारतीय पायलट ने यात्रियों की मदद से उसे काबू किया, सऊदी अरब में कराई इमरजेंसी लैंडिंग
दिल्ली। ओमानी को-पायलट द्वारा फ्लाईदुबई के एक विमान को हाईजैक कर क्रैश करने की कोशिश के बाद इजरायल ने उसे मार गिराने की तैयारी कर ली थी। यह खुलासा सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट में हुआ है। विमान में 170 से ज्यादा यात्री सवार थे। घटना के दौरान विमान तेजी से नीचे जा रहा था और कॉकपिट से हाईजैक का सिग्नल मिलने के बाद इजरायली अधिकारियों ने तय प्रोटोकॉल के तहत कार्रवाई शुरू कर दी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, विमान इजरायल की ओर बढ़ रहा था। करीब 18 हजार फीट नीचे गिरने के दौरान इजरायली एयरफोर्स ने कॉकपिट से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद पहले से तय प्रक्रिया के तहत अधिकारियों ने कमांड सेंटर बनाया और लड़ाकू विमानों को रवाना किया। इजरायल का एयरस्पेस भी बंद कर दिया गया।
भारतीय पायलट ने संभाला कॉकपिट
इजरायली फाइटर जेट्स के पहुंचने से पहले विमान सऊदी अरब की ओर मुड़ गया। इसी दौरान पता चला कि भारतीय पायलट ने को-पायलट से संघर्ष के बाद कॉकपिट का दरवाजा खोल लिया था। विमान में मौजूद कुछ यात्रियों और फ्लाईदुबई के कर्मचारियों ने भी हमलावर को काबू करने में मदद की।
ड्यूटी पर नहीं रहे दो अन्य पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाल लिया। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में आपातकालीन लैंडिंग कराई गई। इस तरह विमान को मार गिराने की संभावित कार्रवाई टल गई।
इजरायल ने क्यों तैयार किए थे फाइटर जेट?
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने लंबे समय से विमान हाईजैक या 9/11 जैसे हमले की स्थिति से निपटने के लिए एक प्रोटोकॉल तैयार कर रखा है। इसके तहत यदि इजरायल की ओर आ रहा कोई विमान संदिग्ध या अनियंत्रित पाया जाता है और उससे संपर्क नहीं हो पाता, तो लड़ाकू विमानों को उसके पास भेजा जाता है।
फाइटर जेट के पायलट विमान के कॉकपिट और केबिन की स्थिति का आकलन करने की कोशिश करते हैं। यदि विमान के अपहरण की पुष्टि हो जाए और अपहरणकर्ता किसी मांग के बिना रेडियो संपर्क भी न करें, तो मामले को इजरायल की शीर्ष सुरक्षा समिति के सामने रखा जाता है।
अंतिम फैसला प्रधानमंत्री का
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इजरायल की नीति के तहत यदि कोई संदिग्ध विमान उसके महत्वपूर्ण ठिकानों की ओर बढ़ रहा हो और यात्रियों की सुरक्षा का कोई विकल्प न बचे, तो उसे हवा में ही मार गिराने का फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, इस तरह की कार्रवाई का अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री के स्तर पर होता है।
फ्लाईदुबई विमान के मामले में स्थिति स्पष्ट होने से पहले ही विमान सऊदी अरब की ओर मुड़ गया और भारतीय पायलट ने नियंत्रण संभाल लिया। इसके चलते इजरायल की संभावित सैन्य कार्रवाई की नौबत नहीं आई। घटना ने विमान सुरक्षा और हाईजैक की स्थिति में देशों के बीच बनाए गए आपातकालीन प्रोटोकॉल को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है।
