रायपुर: नकटी में विधायक कॉलोनी के लिए चारागाह जमीन देना सुप्रीम कोर्ट की अवमानना तो नहीं? मोहम्मद अकबर ने उठाए सवाल

Nakti Land Dispute Mohammad Akbar,

रायपुर के नकटी गांव में सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर प्रस्तावित विधायक कॉलोनी का मामला अब विवादों में घिर गया है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि (चारागाह) को आवासीय कॉलोनी के लिए आवंटित करना सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना हो सकती है।

मोहम्मद अकबर ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के पालन में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी आदेश आज भी प्रभावशील है, लेकिन इसके बावजूद नकटी में जमीन आवंटन की प्रक्रिया चलाई जा रही है।

2011 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश और शासन के निर्देश

पूर्व मंत्री ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य शासन ने सार्वजनिक निस्तारी भूमियों को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए थे:

  • 10 मार्च 2011 का निर्देश: प्रमुख सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) ने राज्य के सभी कलेक्टरों और संभागायुक्तों को पत्र भेजा था।
  • 24 जनवरी 2011 का सुप्रीम कोर्ट आदेश: यह पत्र सुप्रीम कोर्ट के 24 जनवरी 2011 के आदेश के परिपालन में जारी किया गया था, जिसमें मुख्य सचिव को जवाबदावा प्रस्तुत करना था।
  • सुरक्षित रखने के सख्त आदेश: सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि वर्तमान में उपलब्ध निस्तारी भूमियों को चिन्हांकित कर सुरक्षित किया जाए। यह भी स्पष्ट किया गया था कि भविष्य में सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित भूमियों को किसी अन्य प्रयोजन के लिए आवंटित करने का प्रस्ताव न भेजा जाए।

4 अक्टूबर 2024 के निर्देश से खड़ी हुई अवमानना की स्थिति

मोहम्मद अकबर ने बताया कि एक तरफ शासन के निर्देश अस्तित्व में हैं, वहीं दूसरी तरफ कलेक्टर रायपुर द्वारा सचिव (आवास एवं पर्यावरण विभाग) के 4-10-2024 के निर्देशानुसार कार्रवाई की जा रही है।

इस निर्देश के तहत सांसदों और विधायकों के आवास के लिए ग्राम नकटी की सार्वजनिक उपयोग (चारागाह) वाली भूमि को हाउसिंग बोर्ड को आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है। अकबर के अनुसार, यदि यह जमीन हाउसिंग बोर्ड को दी जाती है, तो यह स्पष्ट रूप से सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की स्थिति बन सकती है।

छत्तीसगढ़ में न्यायालय की अवमानना का इतिहास

इस मामले में कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए पूर्व मंत्री ने बताया कि नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद से अब तक किसी भी न्यायालय की अवमानना मामले में किसी को सजा नहीं हुई है।

हालांकि, छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पहले जबलपुर हाईकोर्ट ने रायपुर के संयुक्त पंजीयक (सहकारिता) को अवमानना के मामले में 15 दिनों की सजा सुनाई थी। उसके बाद से राज्य में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

मोहम्मद अकबर ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि प्रमुख सचिव (राजस्व) के निर्देश आज भी अस्तित्व में हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी नकटी की चारागाह भूमि को खाली कराकर हाउसिंग बोर्ड को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं, जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध प्रतीत होता है।