छत्तीसगढ़ की नदियों में घुल रहा जहर, 30 हजार से ज्यादा प्रदूषण के मामले

रायपुर में सबसे ज्यादा 17,371 प्रकरण; रायगढ़ 6,520 और बिलासपुर में 3,729 मामले, सीवरेज-औद्योगिक कचरा बना मुख्य कारण

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नदियों को प्रदूषण से बचाने के दावों के बीच आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। जुलाई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में नदियों को प्रदूषित करने के 30 हजार से ज्यादा प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें रायपुर सबसे आगे है। यहां 17,371 मामले दर्ज हुए हैं। इसके बाद रायगढ़ में 6,520, बिलासपुर में 3,729 और कोरबा में 1,204 प्रकरण सामने आए हैं।

जलशक्ति मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट में नदी प्रदूषण के प्रमुख कारणों में सीवरेज, नालियों का गंदा पानी, घरेलू अपशिष्ट और औद्योगिक कचरे को बताया गया है। रायपुर में शहरी नालियों और सीवरेज का दबाव सबसे बड़ी समस्या है। वहीं रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्रियों से निकलने वाला अपशिष्ट नदी जल को प्रभावित कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार समस्या केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। धमतरी में 594 और कांकेर में 514 मामले दर्ज किए गए हैं। नवापारा में 159, राजिम में 151 और सिमगा में 68 प्रकरण सामने आए हैं। इससे साफ है कि छोटे निकायों में भी नालियों और अपशिष्ट के प्रबंधन की स्थिति चुनौतीपूर्ण है।

रायपुर में सबसे ज्यादा दबाव

रायपुर में बढ़ती आबादी और तेजी से फैलते शहरी क्षेत्र के कारण नालों से निकलने वाले अपशिष्ट का दबाव बढ़ रहा है। कई जगह सीवरेज और गंदा पानी जलस्रोतों तक पहुंच रहा है। इससे नदी की गुणवत्ता और जलीय पर्यावरण पर असर पड़ने की आशंका है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मुख्य अभियंता राजेश शर्मा के अनुसार, NGT के दिशा-निर्देशों के तहत नदियों की अद्यतन स्थिति की रिपोर्ट जलशक्ति मंत्रालय को भेजी गई है। प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। विभाग के मुताबिक 30 हजार से अधिक मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है।