दिल्ली। देशभर में मंगलवार को दशहरा मनाया जाएगा। इस बार रावण दहन के आयोजन में कहीं विशाल पुतले आकर्षण होंगे, तो कहीं सामाजिक समस्याओं पर संदेश दिया जाएगा। दिल्ली के पीतमपुरा में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों को गंदगी से मुक्ति और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है।
मध्यप्रदेश के इंदौर में 111 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। भोपाल और राजस्थान के कोटा में 105-105 फीट, जबकि उज्जैन और रायपुर में 101-101 फीट ऊंचे रावण के पुतले जलाए जाएंगे। इंदौर में 250 फीट लंबी लंका और करीब डेढ़ घंटे की आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र रहेगी। भोपाल में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बनाने पर करीब 20 लाख रुपए खर्च हुए हैं।
कोटा में 5 हजार किलो का रावण
राजस्थान के कोटा में 105 फीट ऊंचा रावण तैयार किया गया है। इसका वजन करीब 5 हजार किलो है। यहां कुंभकर्ण और मेघनाद के 70-70 फीट ऊंचे पुतले भी जलाए जाएंगे। बिहार की राजधानी पटना में 90 फीट ऊंचे रावण के साथ मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन होगा। बारिश से बचाव के लिए पुतलों में स्टील पाइप का इस्तेमाल किया गया है।
रायपुर में 101 फीट का रावण
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के WRS मैदान में 101 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। बोरियाखुर्द में भी रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाएंगे। कारीगरों के मुताबिक, बांस, रंगीन कागज, कपड़े और सजावट के सामान की कीमत बढ़ने से पुतले बनाने की लागत में 15 से 20 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है।
200 साल से ज्यादा पुरानी परंपरा
देश में रावण दहन की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। वर्ष 1834 में ब्रिटिश कलाकार जेम्स प्रिन्सेप की बनाई पेंटिंग में रामनगर में रामलीला और रावण दहन का दृश्य दर्ज है। यह चित्र लंदन की ब्रिटिश लाइब्रेरी में मौजूद है।
हालांकि, देश के हर हिस्से में दशहरा एक ही तरीके से नहीं मनाया जाता। कर्नाटक के मैसूर में देवी चामुंडेश्वरी की महिषासुर पर विजय का उत्सव मनाया जाता है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में सात दिन तक दशहरा चलता है, लेकिन वहां रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले नहीं जलाए जाते। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के रावण गांव में भी ग्रामीण रावण को ग्राम देवता मानकर उसकी पूजा करते हैं।
