खरीफ सीजन में किसानों को खाद-बीज की निर्बाध आपूर्ति, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई; 4,878 केंद्रों का हुआ निरीक्षण

रायपुर। खरीफ सीजन 2026 में डीएपी की राष्ट्रीय स्तर पर सीमित उपलब्धता के बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए लगातार निगरानी कर रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी किसान को उर्वरकों की कमी का सामना न करना पड़े और कालाबाजारी या निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

कृषि विभाग के अनुसार, इस खरीफ सीजन में प्रदेश के लिए 3 लाख मीट्रिक टन डीएपी का लक्ष्य तय किया गया है।

21 जुलाई तक राज्य में 1.84 लाख मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया गया, जिसमें से 1.26 लाख मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है। इसके बाद भी समितियों और गोदामों में 58,054 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है।

यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक उपलब्धता दर्शाता है।

विभाग ने किसानों को केवल डीएपी पर निर्भर रहने के बजाय कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार एनपीके और अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया है।

अधिकारियों का कहना है कि देश में डीएपी का 70 से 80 प्रतिशत और एनपीके का 30 से 40 प्रतिशत आयात किया जाता है।

वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने से उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ा है, हालांकि राज्य सरकार लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों से निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक राशि न वसूली जाए।

अनियमितताओं पर कार्रवाई करते हुए कृषि विभाग ने अब तक 4,878 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया है। इस दौरान 625 नोटिस जारी किए गए, 183 केंद्रों पर बिक्री प्रतिबंध लगाया गया, 98 केंद्रों से उर्वरक जब्त किए गए, 97 लाइसेंस निलंबित और 11 लाइसेंस निरस्त किए गए। इसके अलावा 56 मामले न्यायालय में पेश किए गए तथा 7 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई।

राज्य सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं और सहकारी समितियों से ही उर्वरक खरीदें।

यदि कहीं भी कालाबाजारी, अधिक कीमत वसूली या अन्य अनियमितता की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग या जिला प्रशासन को सूचित करें, ताकि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा सके।