रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन प्रदेश में फ्लाई ऐश और कोयले की अवैध डंपिंग का मुद्दा पूरे जोर-शोर से गूंजा। सदन के भीतर प्रश्नकाल के दौरान इस संवेदनशील विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने रायगढ़ जिले में उद्योगों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण और फ्लाई ऐश की मनमानी डंपिंग को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे। इस मुद्दे पर चर्चा इतनी गरमा गई कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के बीच सीधे तौर पर आंकड़ों और कार्रवाइयों को लेकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए गए, जिसके बाद असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
विधायक उमेश पटेल ने सदन में सरकार से जानना चाहा कि रायगढ़ में कितने उद्योगों से फ्लाई ऐश डंप किया जा रहा है और वित्तीय वर्ष 2023-24 से लेकर अब तक अवैध डंपिंग के कितने मामले दर्ज कर उन पर क्या ठोस कार्रवाई की गई है। इसके जवाब में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने आधिकारिक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि फ्लाई ऐश से संबंधित कुल 49 केस सामने आए हैं। उन्होंने दावा किया कि शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई की गई है और संबंधित उद्योगों से क्षतिपूर्ति राशि के रूप में 6 लाख 90 हजार रुपये जमा करवाकर फ्लाई ऐश का समतलीकरण किया गया है।
- विधायक उमेश पटेल ने पर्यावरण विभाग के अधिकारियों पर काम न करने और गलत जवाब देकर सरकार को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया।
- वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय ट्रांसपोर्टेशन पर कोई कार्रवाई नहीं होती थी, जबकि अब उससे दस गुना ज्यादा कार्रवाई हो रही है।
- ओपी चौधरी के अनुसार, कांग्रेस शासनकाल के वर्ष 2021-22 और 2022-23 में अवैध डंपिंग पर कार्रवाई शून्य (0) रही, जबकि 2023-24 में उनकी सरकार ने 9 लाख रुपये की पेनाल्टी लगाई है।
- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी सरकार का बचाव करते हुए कहा कि उस दौरान केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन लगाया गया था, जिसे वित्त मंत्री ने यह कहकर खारिज कर दिया कि लॉकडाउन तो मार्च 2020 में लगा था।
- विपक्ष के सवालों और वित्त मंत्री के जवाबों से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए अंततः बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।
चर्चा के दौरान उमेश पटेल ने यह भी पूछा कि रायगढ़ में कुल कितने लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उत्पादन हो रहा है और उसमें से कितने प्रतिशत का उचित निराकरण किया जा रहा है। इस पर वित्त मंत्री ने बताया कि इसके लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है और इंटीग्रेटेड सिस्टम भी विकसित किया गया है। लेकिन विपक्ष ने इन जवाबों को नाकाफी और अनर्गल बताया। इससे ठीक पहले बालोद विधायक संगीता सिन्हा के सवाल पर भी बजट में शामिल कार्यों को वित्तीय स्वीकृति न मिलने के मुद्दे को लेकर सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच भारी नोकझोंक हुई थी। इस तरह बजट सत्र का पांचवां दिन पूरी तरह से हंगामे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़ गया।
