कोरबा. छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित हसदेव ताप विद्युत संयंत्र (एचटीपीपी) के ग्राम झाबू में बना राखड़ बांध सोमवार को अचानक टूट गया। बांध का तटबंध ढहने से भारी मात्रा में पानी मिश्रित राख का सैलाब आसपास के गांवों और रिहायशी इलाकों में तेजी से फैल गया है। इस घटना के कारण संयंत्र के समीप बहने वाली हसदेव नदी में राख मिलने का अत्यंत गंभीर खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि अगर राख नदी में मिलती है, तो जल पूरी तरह प्रदूषित होकर सफेद हो जाएगा और इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ेगा। विद्युत उत्पादन कंपनी के 810 मेगावाट क्षमता वाले इस संयंत्र से निकलने वाली राख के निपटान के लिए ग्राम झाबू-लोतलोता के पास यह बांध निर्मित किया गया था।
बांध के काफी पुराने होने और अपनी पूर्ण क्षमता तक भर जाने के कारण प्रबंधन द्वारा पूर्व में कई बार इसकी ऊंचाई बढ़ाई गई थी। हालांकि, राख और पानी के अत्यधिक दबाव के चलते इसका एक बड़ा हिस्सा अचानक टूट गया। इस भीषण रिसाव के कारण आसपास के झाबू, नवागांव, पुरैनाखार, धनरास, लोतलोता, चारपारा, मड़वामहुआ और ढांडपारा जैसे गांवों के निवासियों के सामने दैनिक जीवन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है, ऐसे में तेज धूप से पानी सूखने के बाद यह हानिकारक सूखी राख हवा में उड़कर लोगों के घरों और उनके भोजन तक पहुंचेगी, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होगा।
इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े 5 महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं:
- एचटीपीपी का यह राखड़ बांध काफी पुराना है और क्षमता से अधिक भरने के कारण अत्यधिक दबाव में था।
- बांध के टूटने से राख मिश्रित पानी का तेज बहाव हसदेव नदी और आसपास के क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है।
- ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि हाल ही में बांध में गिरे एक भारी वाहन को निकालने के लिए ठेकेदार ने नियमों को ताक पर रखकर तटबंध को तोड़ा था।
- यह इस संयंत्र में लापरवाही की पहली घटना नहीं है; दो महीने पहले भी बांध फूटने से राख किसानों के खेतों और नहरों तक पहुंच गई थी।
- एचटीपीपी के सिविल विभाग के कार्यपालन अभियंता ने इसे महज ओवरफ्लो बताते हुए सुधार कार्य शुरू करने का दावा किया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वाहन निकालने की घटना के बाद प्रबंधन ने विरोध के बावजूद केवल आंशिक रूप से राख की सफाई कराई थी। उसी लापरवाही का नतीजा है कि सोमवार को बांध का एक बड़ा हिस्सा फिर से ढह गया और राख का सैलाब बेकाबू हो गया। इस संवेदनशील और गंभीर मुद्दे पर एचटीपीपी के सिविल विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता शरद चंद्र पाठक की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है और उन्होंने संपर्क किए जाने पर भी फोन का कोई जवाब नहीं दिया। वहीं, कार्यपालन अभियंता नारायण पटेल का कहना है कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही सब कुछ सामान्य हो जाएगा। बार-बार हो रही इन दुर्घटनाओं ने संयंत्र प्रबंधन की कार्यप्रणाली और राख निपटान की पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
