भारत को वामपंथी उग्रवाद (LWE) से पूरी तरह मुक्त कराने की केंद्र सरकार की तय समय सीमा 31 मार्च 2026 के बिल्कुल आख़िरी दिन छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर संभाग से एक बेहद बड़ी और अहम् ख़बर आई है। ताज़ा Bastar Naxal Surrender (बस्तर नक्सल सरेंडर) अपडेट के अनुसार, सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और सख़्त अभियानों के चलते 7 इनामी माओवादियों ने पुलिस के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं। इन आत्मसमर्पित नक्सलियों की निशानदेही पर पुलिस ने 40 से ज़्यादा घातक हथियार भी ज़ब्त किए हैं, जो इस पूरे नेटवर्क के लिए एक भारी झटका है।
Bastar Naxal Surrender: ‘पूना मारगेम’ अभियान का दिख रहा असर
बस्तर रेंज के आईजी (IG) सुंदरराज पी. ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि यह सरेंडर दंतेवाड़ा पुलिस लाइन में हुआ। इनमें दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 5 माओवादी शामिल हैं। इसके अलावा कांकेर ज़िले में भी दो नक्सलियों ने एके-47 राइफ़ल के साथ आत्मसमर्पण किया है। Bastar Naxal Surrender की इस बड़ी क़ामयाबी के पीछे पुलिस की ख़ास ‘पूना मारगेम’ (नई सुबह, नई शुरुआत) पुनर्वास पहल का सबसे बड़ा हाथ है।
9 लाख का इनाम और हथियारों (Weapons) का जखीरा
सरेंडर करने वाले इन सात नक्सलियों पर कुल 9 लाख रुपये का भारी इनाम घोषित था। सबसे अहम बात यह रही कि इनकी दी गई सटीक जानकारी पर पुलिस ने जंगलों में छिपे 40 हथियार बरामद किए, जिनमें एसएलआर, इंसास, कार्बाइन और बीजीएल लॉन्चर जैसे घातक हथियार शामिल हैं।
मुख्यधारा (Mainstream) में लौटने की आख़िरी अपील
आईजी ने साफ़ किया कि अब भी जंगलों में भटके हुए नक्सलियों के पास हिंसा का रास्ता छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन अपनाने का यह आख़िरी मौक़ा है। प्रशासन लगातार उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने की पूरी ज़िम्मेदारी निभा रहा है।
