DRDO Hypersonic Missile:भारत ने रक्षा और एयरोस्पेस के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए ‘एक्टिवली कूल्ड फुल स्केल स्क्रैमजेट कंबस्टर’ (Actively Cooled Full Scale Scramjet Combustor) का दूसरा सफल परीक्षण किया है।
यह परीक्षण हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL) में शनिवार को किया गया। इस दौरान इंजन 1200 सेकंड (20 मिनट) से अधिक समय तक सफलतापूर्वक चला, जो भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोग्राम के लिए एक मील का पत्थर है।
परीक्षण की खासियत और अहमियत
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस लंबी अवधि के परीक्षण से यह प्रमाणित हो गया है कि यह स्क्रैमजेट इंजन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए आवश्यक अत्यधिक तापीय भार (Extreme Thermal Load) को सहने में पूरी तरह सक्षम है।
- सक्रिय कूलिंग तकनीक: यह तकनीक किसी भी हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी मदद से हथियार अविश्वसनीय गति से सैकड़ों मील की दूरी तय कर सकता है।
- भरोसेमंद तकनीक: 1200 सेकंड तक इंजन का सफल संचालन यह दिखाता है कि भारत अब शुरुआती परीक्षणों से आगे बढ़कर लंबे समय तक स्थिर रहने वाली हाइपरसोनिक तकनीक विकसित कर चुका है।
इस ऐतिहासिक सफलता पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, उद्योग भागीदारों और शिक्षाविदों को बधाई दी है।
क्या होता है स्क्रैमजेट इंजन?
- स्क्रैमजेट एक बेहद एडवांस ‘एयर-ब्रीदिंग इंजन’ है।
- यह इंजन हाइपरसोनिक स्पीड यानी ध्वनि की गति (Speed of Sound) से 5 गुना या उससे ज्यादा रफ्तार पर काम करता है।
- साधारण रॉकेट इंजन अपने साथ ऑक्सीजन भी लेकर चलते हैं, जिससे उनका वजन बढ़ जाता है। जबकि स्क्रैमजेट इंजन वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन का इस्तेमाल करता है, जिससे यह हल्का, अधिक तेज और लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम होता है।
स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग कहां होगा?
इस अत्याधुनिक इंजन का उपयोग भविष्य के कई रक्षा और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में किया जाएगा, जिनमें प्रमुख हैं:
- हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल
- हाई-स्पीड मिलिट्री ड्रोन
- एडवांस स्पेस लॉन्च सिस्टम
- भविष्य के बेहद तेज लड़ाकू प्लेटफॉर्म्स
हाइपरसोनिक हथियारों की सबसे बड़ी खासियत उनकी अत्यधिक गति और हवा में दिशा बदलने की क्षमता होती है। दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इन्हें ट्रैक करना और रोकना लगभग असंभव होता है।
