Petrol Diesel Price Hike:नई दिल्ली। आम आदमी के बजट पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। मई महीने में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग लगी हुई है। सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले 10 दिनों के भीतर तीसरी बार पेट्रोल और डीज़ल (Petrol-Diesel Price) के दाम बढ़ा दिए हैं। सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि सीएनजी (CNG) की कीमतों में भी इजाफा किया गया है। लगातार बढ़ रहे इन दामों को लेकर विपक्ष ने भी मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है।
फिर कितने बढ़े दाम?
ताजा बढ़ोतरी के तहत तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में 90 पैसे के करीब का इजाफा किया है:
- पेट्रोल: पेट्रोल की कीमतों में 87 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।
- डीजल: डीजल की कीमत 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दी गई है।
- सीएनजी: आम जनता को दोहरा झटका देते हुए सीएनजी की कीमतों में भी 1 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है।
बता दें कि इससे पहले 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में 3-3 रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई थी, और फिर 19 मई को करीब 90 पैसे का इजाफा किया गया था। कुल मिलाकर 9 से 10 दिनों के भीतर ईंधन के दामों में लगभग 5 रुपये की वृद्धि हो चुकी है।
महानगरों में पेट्रोल-डीजल के नए भाव
नई बढ़ोतरी के बाद देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल के नए रेट इस प्रकार हैं:
| शहर (City) | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
| दिल्ली (Delhi) | 99.51 | 92.49 |
| चेन्नई (Chennai) | 105.31 | 96.98 |
| मुंबई (Mumbai) | 108.49 | 95.02 |
| कोलकाता (Kolkata) | 110.64 | 97.02 |
विपक्ष का सरकार पर जोरदार हमला
लगातार तीसरी बार दाम बढ़ने पर विपक्षी दलों ने केंद्र की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए तीखा हमला बोला है।
- कांग्रेस का तंज: कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तंज कसते हुए लिखा, “‘महंगाई मैन’ मोदी ने पेट्रोल-डीज़ल पर नौ दिन में पांच रुपये बढ़ा दिए हैं।”
- विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार आम जनता को लूटने में लगी है। “हमें ऐसी सरकार चाहिए जो अर्थव्यवस्था चलाने के बुनियादी सिद्धांतों को समझती हो, और जिसका ध्यान शासन-प्रशासन पर हो, न कि सिर्फ़ पीआर पर।”
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
ईंधन की कीमतों में इस भारी उछाल की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता है। मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी आई है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85-90% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।
