Woman Carries Mother in Law for Pension:रायपुर/लोकल डेस्क। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो एक तरफ तो भारतीय समाज में ‘बहू और सास’ के अटूट रिश्ते और सेवा भाव की अनूठी मिसाल पेश करती है, लेकिन दूसरी तरफ हमारे प्रशासनिक सिस्टम और ‘डिजिटल और सुलभ’ गवर्नेंस के दावों की बेरहमी से पोल खोलती है। राज्य के एक सरकारी कार्यालय में एक महिला अपनी चलने-फिरने में पूरी तरह लाचार बुजुर्ग सास को वृद्धावस्था पेंशन (Old Age Pension) की औपचारिकताएं पूरी कराने के लिए अपनी पीठ पर लादकर पहुंची। इस बेबसी और बेरुखी की खबर सामने आने के बाद से ही प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर बुजुर्ग
जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग महिला अपनी शारीरिक कमजोरी और बीमारी के कारण चलने-फिरने में असमर्थ थी।
- पेंशन की मजबूरी: हर महीने मिलने वाली मामूली सरकारी पेंशन ही इस उम्र में उनके भरण-पोषण का एकमात्र सहारा है। लेकिन नियमों और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) या अंगूठे के निशान (Thumb Impression) जैसी तकनीकी अनिवार्यताओं के चलते उन्हें खुद दफ्तर आना पड़ा।
- नहीं मिली कोई गाड़ी: गरीब परिवार के पास बुजुर्ग को लाने के लिए किसी गाड़ी या व्हीलचेयर की व्यवस्था नहीं थी और न ही प्रशासन की तरफ से ऐसी कोई मानवीय मदद दी गई।
बहू ने पेश की सेवा की अनूठी मिसाल
जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो परिवार की बहू ने हार नहीं मानी। उसने अपनी बुजुर्ग सास को गोद में उठाने की कोशिश की और अंततः उन्हें अपनी पीठ पर लाद लिया। वह इसी हालत में सास को लेकर सरकारी दफ्तर की सीढ़ियां चढ़ी और अधिकारियों के सामने पेश हुई। दफ्तर में मौजूद जिसने भी इस मंजर को देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।
सोशल मीडिया पर फूटा जनता का गुस्सा
‘द सूत्र’ (The Sootr) के माध्यम से इस मार्मिक घटना की जानकारी जैसे ही बाहर आई, सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा भड़क उठा।
- डिजिटल दावों पर सवाल: नागरिकों का कहना है कि एक तरफ सरकारें ‘घर बैठे सरकारी सुविधाएं’ देने और ‘डिजिटल इंडिया’ का दावा करती हैं, वहीं दूसरी तरफ एक बेबस बुजुर्ग महिला को चंद रुपयों की पेंशन के लिए इस तरह प्रताड़ित होना पड़ता है।
- अधिकारियों की संवेदनशीलता पर सवाल: लोगों ने मांग की है कि ऐसे बुजुर्ग और दिव्यांग हितग्राहियों के लिए बैंक या पंचायत स्तर के कर्मचारियों को खुद उनके घर जाकर सत्यापन करना चाहिए, ताकि किसी को इस तरह की लाचारी का सामना न करना पड़े।
यह घटना छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक अमले के लिए एक कड़ा सबक है कि वे कागजी दावों से इतर जमीनी स्तर पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं और व्यवस्था को अधिक संवेदनशील बनाएं।
