RTI Update: महिला पुलिस अधिकारी से जुड़ी शिकायतों की जानकारी नहीं दे सकता हाईकोर्ट, सूचना के अधिकार के तहत याचिका खारिज

High Court RTI Petition Reject

High Court RTI Petition Reject:कानूनी डेस्क। सूचना के अधिकार (Right to Information) के दुरुपयोग को रोकने और किसी सरकारी कर्मचारी की व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी महिला पुलिस अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ प्राप्त हुई शिकायतों, उन पर की गई प्रारंभिक जांच या विभागीय कार्रवाई से जुड़ी जानकारियों को आरटीआई अधिनियम के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसे ‘व्यक्तिगत जानकारी’ (Personal Information) मानते हुए याचिकाकर्ता की पुनर्विचार याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

क्या था पूरा मामला?

एनडब्ल्यू न्यूज 24 (NW News 24) की रिपोर्ट के अनुसार, एक याचिकाकर्ता ने आरटीआई कानून के तहत एक महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ मिली शिकायतों, उन पर विभाग द्वारा की गई जांच रिपोर्ट और की गई कार्रवाई का पूरा विवरण मांगा था।

  • केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) का रुख: इससे पहले केंद्रीय सूचना आयोग ने भी इस जानकारी को देने से इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
  • याचिकाकर्ता की दलील: याचिकाकर्ता का तर्क था कि क्योंकि अधिकारी एक लोक सेवक (Public Servant) है, इसलिए उसके खिलाफ हुई शिकायतें और जांच सार्वजनिक दायरे में आनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका? (कानूनी कारण)

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आरटीआई कानून की मूल भावना और पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों का हवाला देते हुए याचिका को खारिज कर दिया:

  1. धारा 8(1)(j) का उल्लंघन: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत ऐसी किसी भी व्यक्तिगत जानकारी को देने से छूट प्राप्त है, जिसका किसी भी सार्वजनिक गतिविधि या जनहित (Public Interest) से कोई संबंध नहीं है।
  2. व्यक्तिगत गोपनीयता का अधिकार: किसी अधिकारी के खिलाफ मिली शिकायतें, आरोप और उसकी जांच रिपोर्ट पूरी तरह से उस व्यक्ति की निजी जानकारी होती है। इसे सार्वजनिक करने से उस व्यक्ति की निजता और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच सकती है।
  3. कोई व्यापक जनहित नहीं: अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि एक महिला पुलिस अधिकारी की शिकायतों को सार्वजनिक करने में कौन सा ‘व्यापक जनहित’ (Larger Public Interest) छिपा हुआ है। किसी व्यक्तिगत रंजिश या सामान्य जिज्ञासा को जनहित नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि लोक सेवक होने का मतलब यह कतई नहीं है कि किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत गोपनीयता या उसके खिलाफ हुई आंतरिक जांच की रिपोर्ट को कोई भी व्यक्ति आरटीआई के जरिए सार्वजनिक कर सके।