Iran US War Crisis:वाशिंगटन/तेहरान। दुनिया एक बार फिर उस खतरनाक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है जहां एक छोटी सी चिंगारी भी पूरे मिडिल ईस्ट (Middle East) को युद्ध की आग में झोंक सकती है। बीते कुछ घंटों में सामने आए तीन बड़े घटनाक्रमों ने वैश्विक कूटनीति की धड़कनें तेज कर दी हैं। तेल, ताकत और रणनीति के इस खेल में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि मध्य पूर्व में शांति की राह अब और भी कठिन हो गई है।
1. अमेरिका-ईरान में सीधी टक्कर का अंदेशा
हाल के दिनों में अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के आसपास मौजूद ईरान के मिसाइल लॉन्च साइट्स और कुछ नौसैनिक नावों पर स्ट्राइक (Airstrikes) की है।
- अमेरिका का तर्क: अमेरिका ने अपनी इस सैन्य कार्रवाई को ‘सेल्फ डिफेंस’ यानी आत्मरक्षा का कदम बताया है।
- ईरान की चेतावनी: ईरान ने इन हमलों को खुली आक्रामकता माना है। इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बेहद कड़ा बयान जारी करते हुए अमेरिका को इसके गंभीर परिणाम भुगतने और सीधा बदला लेने की चेतावनी दी है।
2. क्वाड बैठक में मार्को रूबियो का बड़ा बयान
तनाव शांत होने की उम्मीदों को दूसरा बड़ा झटका क्वाड (QUAD) बैठक में लगा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान के साथ कोई भी कूटनीतिक समझौता इतनी जल्दी होने वाला नहीं है।
- दोनों देशों के बीच ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम (Nuclear Program) और अमेरिकी प्रतिबंधों (Sanctions) को लेकर अभी भी गहरे मतभेद बने हुए हैं, जिससे यह साफ संकेत गया है कि यह तनाव फिलहाल लंबा खिंचेगा।
3. पाकिस्तान ने ठुकराया इजरायल को मान्यता देने का प्रस्ताव
तीसरा बड़ा घटनाक्रम पाकिस्तान से जुड़ा है। ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) की यह पूरी कोशिश है कि पाकिस्तान भी इजरायल (Israel) को आधिकारिक मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़े।
- हालांकि, इस्लामाबाद ने इस प्रस्ताव से साफ इनकार कर दिया है। पाकिस्तान सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक फिलिस्तीन मुद्दे (Palestine Issue) का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक इजरायल को मान्यता देना किसी भी सूरत में संभव नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
इन तीनों घटनाओं का सीधा असर दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते, होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ रहा है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। युद्ध की आशंकाओं के चलते यह मार्ग पहले से ही काफी प्रभावित रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यहां तनाव एक बार फिर बढ़ा और आवाजाही रुकी, तो सिर्फ मध्य पूर्व नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था भयंकर संकट में फंस जाएगी। ग्लोबल बाजारों में अभी से बेचैनी दिखाई देने लगी है और बातचीत आगे न बढ़ने की स्थिति में हालात और ज्यादा विस्फोटक हो सकते हैं।
