Supreme Court Verdict on SIR:सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार, 27 मई 2026 को भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के पक्ष में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को संवैधानिक रूप से पूरी तरह वैध ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव (Free and Fair Elections) के लिए वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण करना लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है।
क्या है पूरा मामला और SIR का उद्देश्य?
बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कई विपक्षी नेताओं और संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
SIR एक विशेष और गहन प्रक्रिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित या दोहरे पंजीकरण (Duplicate/Fake Voters) वाले नामों को छांटकर बाहर करना है।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: “जब कानून (जन प्रतिनिधित्व अधिनियम) स्वयं चुनाव आयोग को विशेष पुनरीक्षण का अधिकार देता है, तो इस प्रक्रिया को केवल इसलिए अवैध नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह सामान्य प्रक्रियाओं से थोड़ी अलग है। SIR का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची की सटीकता और विश्वसनीयता को बहाल करना है।”
नागरिकता के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं की सबसे बड़ी दलील यह थी कि SIR के जरिए चुनाव आयोग अप्रत्यक्ष रूप से लोगों की नागरिकता (Citizenship) की जांच कर रहा है, जो कि उसका अधिकार क्षेत्र नहीं है। इस पर कोर्ट ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी:
- सीमित अधिकार: चुनाव आयोग वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के सीमित उद्देश्य के लिए दस्तावेजों का सत्यापन कर सकता है। इसे ‘नागरिकता ट्रायल’ नहीं माना जा सकता।
- अंतिम फैसला नहीं: वोटर लिस्ट से किसी का नाम हटा दिए जाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उस व्यक्ति की नागरिकता खत्म हो गई है। चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं कर सकता।
- नागरिकता का निर्धारण: अगर आयोग को दस्तावेजों पर संदेह है, तो वह ऐसे मामलों को नागरिकता अधिनियम (Citizenship Act) के तहत सक्षम प्राधिकारी या केंद्र सरकार को सौंप सकता है। नागरिकता पर अंतिम फैसला उन्हीं एजेंसियों का होगा।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे ये दिग्गज विपक्षी नेता
चुनाव आयोग के इस कदम के खिलाफ कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने याचिकाएं दायर की थीं, जिन्हें कोर्ट ने खारिज कर दिया:
| याचिकाकर्ता (Petitioner) | राजनीतिक दल / संस्था (Party/Organization) |
| महुआ मोइत्रा | तृणमूल कांग्रेस (TMC) |
| मनोज झा | राष्ट्रीय जनता दल (RJD) |
| केसी वेणुगोपाल | कांग्रेस (Congress) |
| सुप्रिया सुले | एनसीपी-एसपी (NCP-SP) |
| योगेंद्र यादव / ADR | राजनीतिक कार्यकर्ता / एनजीओ |
फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने स्वागत किया है। बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इस फैसले ने साफ कर दिया है कि निष्पक्ष चुनाव के लिए चुनाव आयोग द्वारा चलाया गया वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान बिल्कुल सही था। विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद अदालत ने यह मान लिया है कि चुनावी प्रक्रिया की अखंडता सुरक्षित रखने के लिए SIR जैसी प्रक्रियाएं आवश्यक हैं।
