Siddaramaiah Resign Without Governor:बेंगलुरु। कर्नाटक (Karnataka) की राजनीति में सत्ता परिवर्तन को लेकर चल रहे नाटकीय घटनाक्रम में एक नया मोड़ आ गया है। यह लगभग तय माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके लिए उन्होंने गुरुवार को कांग्रेस विधायकों की एक अहम बैठक भी बुलाई है। हालांकि, इस्तीफे की इस औपचारिक प्रक्रिया के बीच एक बड़ा संवैधानिक और तकनीकी पेंच फंस गया है, क्योंकि राज्य के राज्यपाल थावरचंद गहलोत (Governor Thawar Chand Gehlot) फिलहाल राजधानी बेंगलुरु में मौजूद नहीं हैं।
क्या बिना राज्यपाल के इस्तीफा दे सकते हैं मुख्यमंत्री?
आमतौर पर किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री सीधे राजभवन जाकर व्यक्तिगत रूप से राज्यपाल को अपना इस्तीफा (Resignation Letter) सौंपता है। लेकिन राज्यपाल के शहर से बाहर होने के कारण यह सवाल उठ रहा है कि क्या सिद्धारमैया उनके बिना इस्तीफा दे सकते हैं?
- राजभवन में सौंप सकते हैं इस्तीफा: सूत्रों और संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, अगर राज्यपाल मौजूद नहीं हैं, तब भी मुख्यमंत्री अपना आधिकारिक इस्तीफा राजभवन (Raj Bhavan) के कार्यालय या संबंधित प्रमुख सचिव को सौंप सकते हैं।
- संभावित विकल्प: इसके अलावा फैक्स, ईमेल या किसी विशेष दूत के जरिए भी राज्यपाल तक इस्तीफे की सूचना पहुंचाई जा सकती है, जिसे बाद में राज्यपाल द्वारा आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया जाता है।
पहले 11 बजे का था समय, अब बदला प्लान
राजनीतिक हलकों में पहले यह प्रबल संभावनाएं जताई जा रही थीं कि सिद्धारमैया गुरुवार सुबह 11 बजे अपना इस्तीफा दे सकते हैं और राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं। लेकिन राज्यपाल की गैरमौजूदगी ने इस कार्यक्रम को थोड़ा टाल दिया है।
कर्नाटक के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य के मुख्य बिंदु:
| संबंधित पक्ष (Key Parties) | वर्तमान स्थिति (Current Status) |
| सिद्धारमैया | इस्तीफा देना तय माना जा रहा है; गुरुवार को विधायकों की बैठक बुलाई है। |
| राज्यपाल थावरचंद गहलोत | बेंगलुरु से बाहर हैं, जिससे सीधे मुलाकात संभव नहीं हो पा रही है। |
| डीके शिवकुमार | नए मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे; समर्थकों में जश्न का माहौल है। |
| कांग्रेस हाईकमान | सत्ता हस्तांतरण के लिए दिल्ली से लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। |
अब सभी की निगाहें गुरुवार को होने वाली विधायकों की बैठक और राजभवन के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सिद्धारमैया अपना इस्तीफा किस प्रक्रिया के तहत सौंपते हैं।
