17 साल में खंडहर बने सरकारी बंगले: खिड़की-दरवाजे तक ले गए चोर, सड़क-नाली के लिए नहीं मिला था फंड

बिलासपुर। बिलासपुर के बिरकोना में प्रशासनिक अधिकारियों के लिए बनाए गए सरकारी एचआईजी बंगले अब बदहाली की मिसाल बन चुके हैं।

करीब 17 साल पहले 1.75 करोड़ रुपए की लागत से बने ये मकान आज खंडहर में तब्दील हो गए हैं। हालात ऐसे हैं कि असामाजिक तत्व यहां से खिड़की, दरवाजे और अन्य कीमती सामान तक चोरी कर ले गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2008-09 में अधिकारियों के आवास की कमी दूर करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने कोनी क्षेत्र में जमीन का चयन किया था।

इसके बाद हाउसिंग बोर्ड ने एचआईजी श्रेणी के इन आवासों का निर्माण शुरू कराया। निर्माण लगभग पूरा हो चुका था, लेकिन अंतिम चरण में सड़क और नाली निर्माण के लिए बजट कम पड़ गया।

हाउसिंग बोर्ड ने अतिरिक्त राशि की मांग शासन से की, लेकिन फंड मंजूर नहीं हुआ। इसके चलते सड़क और नाली का निर्माण अधूरा रह गया और पूरे प्रोजेक्ट पर ब्रेक लग गया। वर्षों तक उपयोग नहीं होने के कारण भवन वीरान हो गए और धीरे-धीरे उनकी हालत जर्जर होती चली गई।

इधर, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय और पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय में स्टाफ क्वार्टर की जरूरत बनी हुई है। दोनों विश्वविद्यालयों ने इन भवनों को अपने उपयोग के लिए अधिग्रहित करने की पहल भी की थी, लेकिन प्रस्ताव सरकारी फाइलों में ही अटका रह गया।

हाउसिंग बोर्ड के अतिरिक्त आयुक्त अजीत पटेल ने बताया कि बिरकोना स्थित एचआईजी बंगलों को लेकर न्यायपालिका (ज्यूडिशियरी) की ओर से भी मांग आई है। इस संबंध में शासन स्तर पर चर्चा चल रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन भवनों का उपयोग कर लिया जाता, तो करोड़ों रुपए की सरकारी संपत्ति बर्बाद होने से बच सकती थी। अब इन भवनों के पुनर्विकास या उपयोग को लेकर शासन के फैसले का इंतजार है।