100 से ज्यादा फिल्मों में किया काम; ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए नेशनल अवॉर्ड, ‘वेलकम’ के उदय शेट्टी किरदार से भी खूब लोकप्रिय हुए
दिल्ली। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ। वह बेहोशी की हालत में मिले थे। उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों के मुताबिक, सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया।
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। करीब पांच दशक लंबे करियर में उन्होंने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। गंभीर, आक्रामक और भावनात्मक किरदारों के साथ-साथ कॉमेडी में भी उन्होंने अपनी खास छाप छोड़ी।
‘परिंदा’ से ‘क्रांतिवीर’ तक शानदार अभिनय
नाना पाटेकर को 1989 की फिल्म ‘परिंदा’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला था। इसके बाद 1994 में ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। 1996 में ‘अग्निसाक्षी’ के लिए उन्हें एक बार फिर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
इस तरह नाना पाटेकर के नाम तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड रहे। भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए उन्हें 2013 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।
‘वेलकम’ के उदय शेट्टी से कॉमेडी में भी छाए
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ गंभीर भूमिकाओं तक सीमित नहीं रही। 2007 में आई फिल्म ‘वेलकम’ में उन्होंने गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। उनके संवाद और गुस्से से भरे अंदाज पर खूब मीम्स बने। ‘कंट्रोल उदय, कंट्रोल’ आज भी उनके सबसे चर्चित संवादों में गिना जाता है।
उन्होंने ‘वेलकम बैक’ में भी उदय शेट्टी का किरदार निभाया। इसके अलावा ‘अब तक छप्पन’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘प्रहार’, ‘यशवंत’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।
सेना से भी रहा गहरा जुड़ाव
नाना पाटेकर का भारतीय सेना से भी खास जुड़ाव रहा। फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में आर्मी अधिकारी की भूमिका निभाने के लिए उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण लिया था। बाद में वह टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े और उन्हें मानद पद भी मिला।
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी नाना पाटेकर सेना के जवानों के साथ रहे थे। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से अनुमति लेकर अग्रिम इलाकों का दौरा किया था।
किसानों की मदद के लिए बनाया ‘नाम फाउंडेशन’
नाना पाटेकर फिल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ 2015 में ‘नाम फाउंडेशन’ की शुरुआत की थी। संस्था ने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किसानों और उनके परिवारों की मदद के लिए काम किया।
किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता, बच्चों की पढ़ाई में मदद और गांवों में पानी की समस्या दूर करने के लिए तालाब, कुएं और चेक डैम जैसे काम भी किए गए। नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
