कच्चे मकान की परेशानी से मिली मुक्ति, पीएम-जनमन आवास से नोहर साय का पक्का घर का सपना हुआ पूरा

बारिश में टपकती थी छत, अब पक्के मकान में सुरक्षित परिवार; सरकारी सहायता के साथ बचत से पूरा किया निर्माण

रायपुर। बारिश में कच्चे मकान की टपकती छत, घर के क्षतिग्रस्त होने का डर और परिवार की सुरक्षा की चिंता सरगुजा जिले के पहाड़ी कोरवा जनजाति के नोहर साय के जीवन की पुरानी परेशानी थी। सीमित आमदनी के कारण पक्का मकान बनाना उनके लिए आसान नहीं था। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत आवास स्वीकृत होने के बाद उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ। अब परिवार पक्के घर में सुरक्षित और सुकून से रह रहा है।

लुण्ड्रा विकासखंड की ग्राम पंचायत ससौली के ग्राम चांगोरी निवासी नोहर साय को वर्ष 2023-24 में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था। उन्होंने शासकीय सहायता के साथ अपनी मेहनत की कमाई से की गई बचत को मिलाकर मकान का निर्माण पूरा किया।

बारिश में टपकती थी छत, बना रहता था डर

नोहर साय बताते हैं कि पहले परिवार कच्चे मकान में रहता था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था और मकान के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता था। जहरीले जीव-जंतुओं का डर भी रहता था। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे स्वयं पक्का मकान बनवा सकें। ऐसे में परिवार के लिए सुरक्षित घर लंबे समय से सपना बना हुआ था।

सरकारी मदद से बदली जिंदगी

पीएम-जनमन आवास की स्वीकृति मिलने के बाद नोहर साय ने योजना से मिली सहायता राशि और अपनी बचत का उपयोग कर पक्का मकान बनाया। घर तैयार होने के बाद बारिश में छत टपकने और मकान गिरने जैसी चिंताएं दूर हो गईं। परिवार को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास मिला है।

नोहर साय के लिए यह मकान सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि वर्षों की परेशानी से मिली राहत है। पक्की छत ने परिवार को मौसम की मार से सुरक्षा देने के साथ सम्मान और आत्मविश्वास भी दिया है।

विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में पीएम-जनमन महत्वपूर्ण पहल है। नोहर साय की कहानी इसका उदाहरण है कि सरकारी सहायता और परिवार की मेहनत मिलकर किस तरह कच्चे घर से पक्के आशियाने तक का सफर पूरा कर सकती है।