Bullock Cart Wedding Chhattisgarh:आजकल की शादियों में जहां लग्जरी कारों, हेलीकॉप्टर और महंगे डीजे-बैंड का चलन काफी बढ़ गया है, वहीं छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के गरियाबंद (Gariaband) जिले से एक बेहद सुखद और अनोखी तस्वीर सामने आई है। यहां एक दूल्हे ने अपनी शादी को खास बनाने और पुरानी लोक संस्कृति को सहेजने के लिए अपनी बारात किसी आधुनिक वाहन में नहीं, बल्कि पारंपरिक बैलगाड़ी (Bullock Cart) पर निकाली। सादगी से भरी इस अनोखी बारात ने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींचा है और सोशल मीडिया पर भी इसकी जमकर तारीफ हो रही है।
कपसीडीह से मुड़तराई तक का अनोखा सफर
इस अनोखी पहल को हकीकत में बदलने वाले दूल्हे का नाम पवन ध्रुव है। पवन पेशे से एक इलेक्ट्रीशियन (Electrician) हैं और इसके साथ ही वे खेती-किसानी का काम भी करते हैं।
- मंगलवार को पवन की यह बारात गरियाबंद के कपसीडीह गांव से मुड़तराई गांव के लिए निकली।
- इस पूरी पहल में पवन के पिता रमेश्वर ध्रुव और उनके पूरे परिवार ने उनका उत्साहवर्धन किया।
- बैलगाड़ी को पारंपरिक तरीके से बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया था, जिसमें बैठकर दूल्हा अपनी दुल्हनिया को लेने पहुंचा।
फिजूलखर्ची पर रोक और पर्यावरण का संदेश
आज जब शादियों में दिखावा और बेतहाशा खर्च बढ़ता जा रहा है, ऐसे में पवन ध्रुव की यह बैलगाड़ी बारात समाज के लिए एक बड़ी मिसाल बनकर सामने आई है।
सादगी की मिसाल: गांव की पगडंडियों से गुजरती इस सजी-धजी बैलगाड़ी बारात को देखकर हर कोई मुस्कुरा उठा। इस पहल ने साबित किया कि साधारण जीवन जीने वाले लोग भी समाज को 1 बड़ा और सकारात्मक संदेश दे सकते हैं।
संस्कृति का संरक्षण: दूल्हे और उसके परिवार ने इस शादी के जरिए यह संदेश दिया है कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में भी हमें अपनी जड़ों और छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति से जुड़े रहना चाहिए।
पर्यावरण के अनुकूल (Eco-Friendly): गाड़ियों के जहरीले धुएं और डीजे के भारी शोर-शराबे से दूर, यह पारंपरिक बारात पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल रही।
